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> संकल्प के समय, पंडित जी 1 भक्त का नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
> विशेष सेवाएँ: आप वस्त्र दान, गौ सेवा या चढ़ावा सेवा जैसी विशेष सेवाओं को अपने नाम से जोड़ सकते हैं।
> पूजा और अर्पण का पूरा वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर साझा किया जाएगा।
> 8–10 दिनों के भीतर, आपको प्रसाद, रक्षा सूत्र और अन्य पवित्र वस्तुओं से युक्त दिव्य आशीर्वाद बॉक्स नि:शुल्क Via Veda द्वारा आपके पते पर भेजा जाएगा।
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> 8–10 दिनों के भीतर, आपको प्रसाद, रक्षा सूत्र और अन्य पवित्र वस्तुओं से युक्त दिव्य आशीर्वाद बॉक्स नि:शुल्क Via Veda द्वारा आपके पते पर भेजा जाएगा।
> संकल्प के समय, पंडित जी 6 भक्तों के नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
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> संकल्प : पूजा के दौरान, पंडित जी भक्तों का नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
> विशेष सेवाएँ: वस्त्र दान, गौ सेवा या चढ़ावा सेवा जैसी पूज्यनीय सेवाओं का चयन कर अपनी आस्था को और विशेष बनाएं आपके नाम से संपन्न की जाएगी।
> निजी पूजा वीडियो: आपकी पूजा और अर्पण का उच्च गुणवत्ता वाला वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
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यह महायज्ञ तंत्र-मंत्र, नज़र दोष और अदृश्य नकारात्मक प्रभावों को समाप्त करने में सहायक है।
कहा जाता है कि इस पूजा को करने से काल भैरव की कृपा से व्यक्ति निर्भय बनता है और मानसिक स्थिरता प्राप्त करता है।
माना जाता है कि काल भैरव के आशीष से शत्रुओं द्वारा उत्पन्न बाधाएं, षड्यंत्र और अचानक आने वाले संकट दूर होते हैं।
यह पूजा व्यक्ति के भीतर आत्मबल, निर्णय शक्ति और नेतृत्व क्षमता को जागृत करती है।
काल भैरव की उपासना से जीवन में एक शक्तिशाली रक्षा कवच बनता है, जिससे कार्यों में सफलता मिलती है।
कालाष्टमी को काल भैरव जयंती, जिसे भैरव अष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, भगवान शिव के उग्र रूप काल भैरव के प्राकट्य का दिन माना जाता है। काल भैरव के प्राकट्य से जुड़ी एक प्राचीन कथा है। कहा जाता है कि एक बार भगवान विष्णु और ब्रह्मदेव में यह विवाद हुआ कि उनमें से कौन श्रेष्ठ है, और दोनों ने एक-दूसरे को अपनी संतान बताया। उसी समय, एक अग्नि स्तंभ प्रकट हुआ और घोषणा की कि जो इस स्तंभ का आदि या अंत ढूंढ लेगा, वही श्रेष्ठ माना जाएगा। ब्रह्मदेव ने हंस का रूप धारण कर स्तंभ का शीर्ष ढूंढ़ने का प्रयास किया, जबकि भगवान विष्णु ने वराह का रूप धारण कर स्तंभ का उद्गम जानने का प्रयास किया। विष्णु जी ने स्वीकार किया कि वे स्तंभ का अंत नहीं जान सके, परंतु ब्रह्मा जी ने झूठ बोलते हुए कहा कि उन्होंने इसका शीर्ष खोज लिया है। तब उस स्तंभ से सदाशिव मानव रूप में प्रकट हुए और ब्रह्मदेव के इस झूठ से क्रोधित हुए उन्हें श्राप दिया कि उनकी पूजा कभी नहीं की जाएगी।
क्रोध में आकर ब्रह्मदेव के पांचवे मुख ने सदाशिव का अपमान किया, जिसके परिणामस्वरूप भगवान शिव ने अपने रूद्र रुपी भैरवनाथ को उत्पन्न किया, जिन्होंने ब्रह्मा का वह पांचवा सिर काट दिया। ब्रह्महत्या का पाप लगने के कारण वह सर भैरवनाथ के हाथों से अलग नहीं हुआ और वह इसी तरह ब्रह्मांड में भ्रमण करते रहे, जिससे वह ‘काल’ यानी समय से भी आगे निकल गए। अंततः काशी में ब्रह्मा का सिर उनके हाथ से गिर गया और वे इस पाप से मुक्त हो गए। तब भगवान शिव ने घोषणा की कि काल भैरव ने समय चक्र पर विजय प्राप्त कर ली है, इसलिए उनका नाम ‘काल भैरव’ होगा। हालांकि काल भैरव को उज्जैन शहर का संरक्षक भी कहा जाता है इसलिए यह पूजा अगर उज्जैन स्थित काल भैरव मंदिर में कराई जाए तो यह अत्यंत प्रभावशाली होगी।
भगवान काल भैरव का मंदिर भारत के मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में स्थित है। काल भैरव को उज्जैन शहर का संरक्षक भी कहा जाता है और यह मंदिर इन्हीं को समर्पित है। इस मंदिर में भगवान कालभैरव के वैष्णव स्वरूप की पूजा की जाती है। उज्जैन के काल भैरव मंदिर को राजा भद्रसेन ने बनवाया था, जिसका जिक्र स्कन्द पुराण के अवन्ती खंड में भी किया गया है। परमार शासनकाल (9वीं से 13वीं शताब्दी) के दौरान की शिवजी, माँ पार्वती, भगवान विष्णु और गणेश जी की प्रतिमाएं इसी जगह से मिली है। वहीं राजा भोज के समय इस मंदिर का पुनर्निर्माण भी करवाया गया था। उज्जैन के राजा महाकाल ने ही कालभैरव को शहर की रक्षा के लिए नियुक्त किया है। इसी वजह से कालभैरव को शहर का कोतवाल भी कहा जाता है। भैरव बाबा के इस मंदिर में उनको मदिरा चढ़ाई जाती है, लेकिन मदिरा जाती कहां है ये रहस्य आज रहस्य बनके ही रह गया है।
कालभैरव की इस प्रतिमा को मदिरा पीते हुए देखने के लिए यहां हजारों श्रद्धालु हर रोज पहुंचते हैं। इस मंदिर में भगवान कालभैरव की प्रतिमा सिंधिया पगड़ी पहने हुए दिखाई देती है। यह पगड़ी बाबा भैरवनाथ के लिए ग्वालियर के सिंधिया परिवार की ओर से आती है। यह प्रथा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। उज्जैन के काल भैरव मंदिर का निर्माण मराठा स्थापत्य शैली के अनुसार किया है, मंदिर की दीवारों में मालवा शैली में बने शानदार चित्रों के अवशेष अभी भी देखने को मिलते हैं। वहीं मंदिर के गर्भ गृह में भगवान काल भैरव की मूर्ति एक चट्टान के रूप में विराजमान है। उज्जैन के इस कालभैरव बाबा को मदिरा का भोग लगाया जाता है। इसके अलावा भक्त यहाँ पर मावे और बेसन के लड्डू का भी भोग लगाते हैं।
ViaVeda एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो आपको धार्मिक सेवाओं का लाभ उठाने का अवसर देता है। इसके माध्यम से आप गौसेवा, अन्नदान, और मंदिरों के पुनर्निर्माण में योगदान दे सकते हैं। साथ ही, आप अनुभवी ज्योतिषियों से परामर्श कर कुंडली, अंक ज्योतिष और वास्तु जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
पूजा के दिन मानसिक और शारीरिक शुद्धता का ध्यान रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और इष्टदेव का स्मरण करें। पूजा की प्रक्रिया के बारे में आपको पहले से सूचित किया जाएगा, और पूजा के बाद इसका रिकॉर्डेड वीडियो आपको भेजा जाएगा।
यदि आपको पूजा से संबंधित अधिक जानकारी चाहिए, तो आप ViaVeda के कस्टमर सपोर्ट नंबर +91 98109 86076 पर संपर्क कर सकते हैं। हमारी टीम आपकी हर संभव सहायता के लिए तत्पर है।
ViaVeda एक भरोसेमंद मंच है जो आपको घर बैठे पूजा करने का अवसर प्रदान करता है। आपकी पूजा बुकिंग के बाद, योग्य पुजारियों द्वारा शुभ मुहूर्त में अनुष्ठान संपन्न किया जाता है। इसके बाद, आपके दिए गए पते पर प्रसाद और पुजारी जी द्वारा आपके नाम और गोत्र से की गई पूजा का वीडियो आपके रजिस्टर्ड व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
पूजा बुक होने के बाद, हमारी टीम 24 घंटों के अंदर आपसे संपर्क करेगी और आपका नाम, गोत्र आदि की जानकारी लेगी। आप टीम से पूजा से जुड़ी अन्य जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।
ऑफलाइन और ऑनलाइन पूजा की प्रक्रिया में ज्यादा अंतर नहीं है। दोनों में ही पुजारी आपके नाम और गोत्र से अनुष्ठान करते हैं। अंतर यह है कि ऑफलाइन पूजा में आपको स्वयं मंदिर जाना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन पूजा में आप घर बैठे यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। पूजा का रिकॉर्डेड वीडि यो आपको बाद में भेज दिया जाएगा।
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