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अकाल मृत्यु भय से मुक्ति, भाई की लंबी उम्र , उत्तम स्वास्थ्य, यम दंड से मुक्ति एवं संकटों से रक्षा।
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🌸 भाई दूज को यम द्वितीया क्यों कहा जाता है? जानिए यमराज और देवी यमुना की पौराणिक कथा
कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाया जाने वाला भाई दूज केवल भाई-बहन के प्रेम का पर्व नहीं, बल्कि इसके पीछे यमराज और देवी यमुना की एक विशेष पौराणिक कथा भी है। इसीलिए इसे यम द्वितीया कहा जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, सूर्यदेव की संतान यमराज और देवी यमुना भाई-बहन थे। देवी यमुना अपने भाई को बार-बार भोजन के लिए आमंत्रित करती थीं, लेकिन यमराज अपने कर्तव्यों में व्यस्त होने के कारण नहीं आ पाते थे।
एक दिन यमराज अपनी बहन के घर पहुँचे। देवी यमुना ने प्रेमपूर्वक उनका तिलक किया, आदर-सत्कार किया और भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने उनसे वरदान मांगने को कहा। तब देवी यमुना ने प्रार्थना की कि इस तिथि पर जो बहन अपने भाई का तिलक करे, उसके भाई को सुरक्षा और दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त हो।
मान्यता है कि यमराज ने यह वरदान स्वीकार किया और तभी से भाई दूज मनाने की परंपरा शुरू हुई। इसीलिए इस दिन बहनें भाइयों की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और संकटों से रक्षा की प्रार्थना करती हैं। साथ ही, यमराज और देवी यमुना की संयुक्त आराधना तथा यमुना स्नान का भी विशेष महत्व माना जाता है।
इसी पावन अवसर पर VIAVEDA द्वारा मथुरा के श्री यमुना धर्मराज मंदिर में यम दंड मुक्ति पूजा, यम स्तुति एवं यमुना दूध अभिषेक का विशेष आयोजन किया जाएगा, जिसमें भक्त अपने भाइयों की दीर्घायु, आरोग्य और सुरक्षा का आशीर्वाद मांग सकेंगे।
⚖️ भाई दूज पर यम दंड मुक्ति पूजा क्यों की जाती है?
सनातन धर्म में यमराज को धर्मराज भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे जीवों के कर्मों का न्याय करते हैं और कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसी कारण यमराज को मृत्यु के देवता के साथ-साथ धर्म और न्याय का अधिष्ठाता भी माना जाता है। पौराणिक मान्यताओं में यम दंड का संबंध कर्मों के अनुसार मिलने वाले दंड से जोड़ा जाता है। वहीं भाई दूज वह विशेष तिथि मानी जाती है, जब यमराज ने अपनी बहन यमुना के आग्रह पर भाइयों की सुरक्षा और दीर्घायु का वरदान दिया था।
📿 भाई दूज पर यम स्तुति का क्या महत्व है?
यम स्तुति भगवान यमराज की प्रार्थना और आराधना का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। पौराणिक परंपरा में पतिव्रता सावित्री की कथा भी यमराज से जुड़ी हुई है। जब यमराज उनके पति सत्यवान के प्राण लेकर जा रहे थे, तब सावित्री ने अपनी भक्ति, दृढ़ संकल्प और धर्मपूर्ण वचनों से यमराज को प्रसन्न किया। कथा के अनुसार, अंततः यमराज ने सावित्री को वरदान प्रदान किए, जिनके फलस्वरूप सत्यवान को पुनः जीवन प्राप्त हुआ। यह कथा यमराज की न्यायप्रियता तथा श्रद्धा, धर्म और दृढ़ संकल्प के महत्व को दर्शाती है। भाई दूज के अवसर पर यम स्तुति के माध्यम से भक्त धर्मराज से अकाल मृत्यु के भय की शांति, दीर्घायु, आरोग्य और जीवन में आने वाले संकटों से रक्षा का आशीर्वाद मांगते हैं।
🌊 भाई दूज पर देवी यमुना का दूध अभिषेक क्यों विशेष माना जाता है?
भाई दूज की पौराणिक कथा में देवी यमुना का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। देवी यमुना के स्नेह और प्रार्थना के कारण ही यमराज द्वारा भाई की सुरक्षा एवं दीर्घायु का वरदान दिए जाने की मान्यता प्रचलित है। इसीलिए यम द्वितीया पर देवी यमुना की आराधना और यमुना स्नान को विशेष धार्मिक महत्व दिया जाता है।
यमुना को पवित्रता, करुणा और भक्तों के कल्याण की देवी माना जाता है। धार्मिक परंपराओं में उनके पूजन से पापों की शांति, सुख-समृद्धि और पारिवारिक मंगल का आशीर्वाद मांगा जाता है। इस विशेष अनुष्ठान में देवी यमुना का दूध अभिषेक किया जाएगा। दूध को धार्मिक पूजा में पवित्रता, शुद्धता और मंगल का प्रतीक माना जाता है। देवी यमुना के दूध अभिषेक के माध्यम से भक्त अपने भाइयों की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, पारिवारिक सुख-शांति और संकटों से रक्षा की प्रार्थना करेंगे।
🛕 मथुरा के श्री यमुना धर्मराज मंदिर में यह पूजा क्यों विशेष है?
भगवान श्रीकृष्ण की पावन जन्मभूमि मथुरा, देवी यमुना की आराधना का एक महत्वपूर्ण तीर्थ क्षेत्र है। ब्रज की धार्मिक परंपरा में यमुना जी को अत्यंत पूजनीय स्थान प्राप्त है। भाई दूज का पर्व स्वयं देवी यमुना और उनके भाई धर्मराज यम से जुड़ा हुआ है। इसलिए इस पवित्र अवसर पर दोनों की संयुक्त आराधना का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। मथुरा के श्री यमुना धर्मराज मंदिर में भाई दूज के अवसर पर आयोजित यह अनुष्ठान भक्तों को यमराज और देवी यमुना से जुड़े इस पौराणिक पर्व पर विशेष पूजा करने का अवसर प्रदान करता है। यहाँ यम दंड मुक्ति पूजा, यम स्तुति और यमुना दूध अभिषेक के माध्यम से भाइयों की दीर्घायु, आरोग्य, अकाल मृत्यु के भय की शांति और पारिवारिक मंगल का आशीर्वाद मांगा जाएगा।
🙏 इस विशेष भाई दूज महापूजा में क्या होगा?
इस भाई दूज VIAVEDA के माध्यम से मथुरा के श्री यमुना धर्मराज मंदिर में भक्तों के नाम एवं गोत्र से संकल्प लेकर यमराज और देवी यमुना की विशेष आराधना संपन्न कराई जाएगी।
अनुष्ठान के प्रमुख भाग होंगे:
इस भाई दूज अपने भाई की लंबी उम्र और सुरक्षा की प्रार्थना को बनाएं और भी विशेष। VIAVEDA के माध्यम से मथुरा में यमराज एवं देवी यमुना की इस दिव्य पूजा में सम्मिलित हों।
मथुरा भगवान श्रीकृष्ण की पावन जन्मभूमि होने के साथ-साथ देवी यमुना की आराधना का भी महत्वपूर्ण तीर्थ क्षेत्र है। ब्रज संस्कृति में यमुना जी को अत्यंत पवित्र और पूजनीय माना जाता है। भाई दूज, जिसे यम द्वितीया कहा जाता है, का धार्मिक संबंध देवी यमुना और उनके भाई धर्मराज यम से है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसी तिथि पर देवी यमुना ने यमराज का तिलक और आदर-सत्कार किया था, जिसके बाद यमराज ने भाइयों की सुरक्षा और दीर्घायु से जुड़ा वरदान दिया था।
मथुरा के श्री यमुना धर्मराज मंदिर में इस विशेष अवसर पर यमराज और देवी यमुना की संयुक्त आराधना भक्तों के लिए धार्मिक महत्व रखती है। यहाँ भाई दूज पर यम दंड मुक्ति पूजा, यम स्तुति एवं यमुना दूध अभिषेक के माध्यम से अकाल मृत्यु के भय की शांति, भाई की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और पारिवारिक सुरक्षा का आशीर्वाद मांगा जाएगा। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां मृत्यु के देवता भगवान धर्मराज (यमराज) और उनकी बहन देवी यमुना एक साथ विराजमान हैं।
भाई दूज पर यमराज की विशेष आराधना के माध्यम से भक्त अकाल मृत्यु के भय की शांति, सुरक्षित जीवन और दीर्घायु का आशीर्वाद मांगते हैं।
यम द्वितीया की पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन यमराज और देवी यमुना की पूजा भाई की लंबी उम्र और मंगल की कामना से की जाती है।
यम स्तुति एवं देवी यमुना के अभिषेक के माध्यम से भाइयों और परिवार के सदस्यों के उत्तम स्वास्थ्य, आरोग्य और सुखमय जीवन की प्रार्थना की जाती है।
धर्मराज यम की विशेष पूजा के माध्यम से भक्त कर्मजनित कष्टों की शांति, यम दंड से मुक्ति और जीवन में शुभता का आशीर्वाद मांगते हैं।
यमराज और देवी यमुना की संयुक्त आराधना के माध्यम से भक्त अपने भाइयों और परिवार के लिए संकटों से रक्षा, सुख-शांति और मंगलमय जीवन की प्रार्थना करते हैं।





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संकल्प के दौरान, हमारे पंडित जी 2 भक्तों के नाम और पारिवारिक गोत्र का उच्चारण करेंगे।
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लक्ष्मी पूजा का अनुभव परिवार के लिए बहुत शुभ रहा।
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Via Veda एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो आपको धार्मिक सेवाओं का लाभ उठाने का अवसर देता है। इसके माध्यम से आप गौसेवा, अन्नदान, और मंदिरों के पुनर्निर्माण में योगदान दे सकते हैं। साथ ही, आप अनुभवी ज्योतिषियों से परामर्श कर कुंडली, अंक ज्योतिष और वास्तु जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
पूजा के दिन मानसिक और शारीरिक शुद्धता का ध्यान रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और इष्टदेव का स्मरण करें। पूजा की प्रक्रिया के बारे में आपको पहले से सूचित किया जाएगा, और पूजा के बाद इसका रिकॉर्डेड वीडियो आपको भेजा जाएगा।
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Via Veda एक भरोसेमंद मंच है जो आपको घर बैठे पूजा करने का अवसर प्रदान करता है। आपकी पूजा बुकिंग के बाद, योग्य पुजारियों द्वारा शुभ मुहूर्त में अनुष्ठान संपन्न किया जाता है। इसके बाद, आपके दिए गए पते पर प्रसाद और पुजारी जी द्वारा आपके नाम और गोत्र से की गई पूजा का वीडियो आपके रजिस्टर्ड व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
पूजा बुक होने के बाद, हमारी टीम 24 घंटों के अंदर आपसे संपर्क करेगी और आपका नाम, गोत्र आदि की जानकारी लेगी। आप टीम से पूजा से जुड़ी अन्य जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।
ऑफलाइन और ऑनलाइन पूजा की प्रक्रिया में ज्यादा अंतर नहीं है। दोनों में ही पुजारी आपके नाम और गोत्र से अनुष्ठान करते हैं। अंतर यह है कि ऑफलाइन पूजा में आपको स्वयं मंदिर जाना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन पूजा में आप घर बैठे यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। पूजा का रिकॉर्डेड वीडि यो आपको बाद में भेज दिया जाएगा।
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