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महाशिवरात्रि विशेष: शिव पार्वती चढ़ावा
रिश्तों में मधुरता व सुखद वैवाहिक जीवन का दिव्य आशीर्वाद
  • त्रियुगीनारायण मंदिर, उत्तराखंड
  • February 15, Sunday

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चढ़ावा के लाभ
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महाशिवरात्रि के मौके पर शिव–पार्वती को अर्पित किया गया चढ़ावा हृदय की पवित्र भावनाओं को सशक्त करता है, जिससे जीवन में सच्चा, स्थिर और निष्ठावान प्रेम प्राप्त होने का मार्ग प्रशस्त होता है।
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महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर इस चढ़ावे से विवाह में आ रही देरी, पारिवारिक अड़चनें और ग्रह बाधाएँ शांत होती हैं, जिससे विवाह के योग शीघ्र बनते हैं।
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महाशिवरात्रि के शुभ संयोग पर शिव–पार्वती के आदर्श दांपत्य की कृपा से पति–पत्नी के बीच प्रेम, समझ और सामंजस्य बढ़ता है, जिससे दांपत्य जीवन सुखमय बनता है।
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महाशिवरात्रि पर किए गए इस चढ़ावे के माध्यम से शिव–शक्ति की एक साथ कृपा प्राप्त होती है, जो जीवन में संतुलन, स्थिरता और सकारात्मक परिवर्तन लाती है।
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महाशिवरात्रि के दिन श्रद्धा और विश्वास के साथ अर्पित किया गया चढ़ावा भक्त की सच्ची इच्छाओं को भगवान तक पहुँचाता है और उचित समय पर उनकी पूर्ति का आशीर्वाद देता है।
चढ़ावा के बारे में
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जब जीवन में अचानक चुनौतियाँ बढ़ने लगती हैं, रिश्तों में मधुरता कम होने लगती है, पति–पत्नी के बीच दूरियाँ और मनमुटाव घर कर लेते हैं, या मन निरंतर तनाव और अस्थिरता से घिरा रहता है, तब मनुष्य भीतर से विचलित हो जाता है। ऐसे समय में महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती की शरण में जाना जीवन को नई दिशा देने वाला सिद्ध होता है। महाशिवरात्रि शिव–पार्वती के दिव्य मिलन का पर्व है, जिसे शास्त्रों में दांपत्य सुख, प्रेम और पारिवारिक संतुलन प्रदान करने वाला अत्यंत पावन पर्व माना गया है। इसलिए इस दिन किया गया शिव–पार्वती चढ़ावा अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है।

यह चढ़ावा न केवल जीवन की नकारात्मक ऊर्जा, मानसिक तनाव और वैवाहिक कष्टों को दूर करता है, बल्कि रिश्तों में आई कड़वाहट को भी समाप्त कर प्रेम, विश्वास और सामंजस्य को पुनः स्थापित करता है। जिन भक्तों के जीवन में बार-बार मतभेद, असंतोष या भावनात्मक दूरी आ रही हो, उनके लिए यह चढ़ावा सुखद परिवर्तन का माध्यम बनता है। उत्तराखंड में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर वह दिव्य स्थल है जहाँ स्वयं भगवान शिव और माता पार्वती का पवित्र विवाह संपन्न हुआ था। मान्यता है कि महाशिवरात्रि जैसे महापर्व पर यहाँ अर्पित किया गया शिव–पार्वती चढ़ावा तुरंत स्वीकार होता है और शिव–शक्ति की संयुक्त कृपा शीघ्र प्राप्त होती है। वायावेदा के माध्यम से आप इस महाशिवरात्रि पर शिव–पार्वती को चढ़ावा अर्पित कर रिश्तों में मधुरता, सुखद वैवाहिक जीवन और आजीवन दांपत्य सौहार्द का दिव्य आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं ताकि आपके जीवन में पुनः प्रेम, शांति और स्थिरता का प्रकाश फैल सके।

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मंदिर के बारे में
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त्रियुगीनारायण मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित एक ऐतिहासिक और पवित्र स्थल है, जो उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण गांव में स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रियुगीनारायण को हिमवत की राजधानी माना जाता था और यहीं पर भगवान शिव और देवी पार्वती का पवित्र विवाह हुआ था। कहा जाता है कि शिव और पार्वती का विवाह इसी विशाल हवन कुंड में हुआ था, जिसमें चारों दिशाओं में अग्नि प्रज्वलित की गई थी। इस दिव्य विवाह समारोह में ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देवताओं और संतों ने भाग लिया था। इस हवन कुंड की राख को आज भी भक्त अपने घर ले जाते हैं, और इसे अपने वैवाहिक जीवन के सुखमय होने के लिए एक आशीर्वाद मानते हैं।

त्रियुगीनारायण नाम इसी कारण पड़ा क्योंकि यहाँ तीन युगों के चिन्ह देखे जाते हैं, जो भगवान विष्णु, शिव और पार्वती के दिव्य संबंधों को दर्शाते हैं। इस मंदिर परिसर में चार महत्वपूर्ण कुंड स्थित हैं: रुद्राकुंड, विष्णु कुंड, ब्रह्मकुंड और सरस्वती कुंड। इन कुंडों का जल बहुत पवित्र माना जाता है, और यही वह स्थान है जहाँ देवताओं ने शिव-पार्वती के विवाह के दौरान स्नान किया था। विशेष रूप से सरस्वती कुंड का जल विष्णु की नाभि से उत्पन्न माना जाता है, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। इसलिए, पाप कर्मों से मुक्ति, वैवाहिक सुख एवं दांपत्य सामंजस्य एवं सुख समृद्धि के लिए चढ़ाया जाने वाला चढ़ावा इस मंदिर में अत्यंत फलदायी माना जाता है। वायावेदा आपके नाम से यह अनुष्ठान संपन्न कराकर आशीर्वाद आपके घर तक पहुँचाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Via Veda एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो आपको धार्मिक सेवाओं का लाभ उठाने का अवसर देता है। इसके माध्यम से आप चढ़ावा सेवा, गौसेवा, अन्नदान, और मंदिरों के पुनर्निर्माण में योगदान दे सकते हैं। साथ ही, आप अनुभवी ज्योतिषियों से परामर्श कर कुंडली, अंक ज्योतिष और वास्तु जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
चढ़ावा के दिन मानसिक और शारीरिक शुद्धता का ध्यान रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और इष्टदेव का स्मरण करें। चढ़ावा की प्रक्रिया के बारे में आपको पहले से सूचित किया जाएगा, और पूजा के बाद इसका रिकॉर्डेड वीडियो आपको भेजा जाएगा।
यदि आपको पूजा से संबंधित अधिक जानकारी चाहिए, तो आप Via Veda के कस्टमर सपोर्ट नंबर +91 98109 86076 पर संपर्क कर सकते हैं। हमारी टीम आपकी हर संभव सहायता के लिए तत्पर है।
Via Veda एक भरोसेमंद मंच है जो आपको घर बैठे पूजा करने का अवसर प्रदान करता है। आपकी पूजा बुकिंग के बाद, योग्य पुजारियों द्वारा शुभ मुहूर्त में अनुष्ठान संपन्न किया जाता है। इसके बाद, आपके दिए गए पते पर प्रसाद और पुजारी जी द्वारा आपके नाम और गोत्र से की गई चढ़ावा का वीडियो आपके रजिस्टर्ड व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
चढ़ावा बुक होने के बाद, हमारी टीम 24 घंटों के अंदर आपसे संपर्क करेगी और आपका नाम, गोत्र आदि की जानकारी लेगी। आप टीम से चढ़ावा से जुड़ी अन्य जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।
ऑफलाइन और ऑनलाइन चढ़ावा की प्रक्रिया में ज्यादा अंतर नहीं है। दोनों में ही पुजारी आपके नाम और गोत्र से अनुष्ठान करते हैं। अंतर यह है कि ऑफलाइन चढ़ावा में आपको स्वयं मंदिर जाना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन चढ़ावा में आप घर बैठे यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। चढ़ावा का रिकॉर्डेड वीडियो आपको बाद में भेज दिया जाएगा।
हाँ, Via Veda द्वारा करवाई गई चढ़ावा के बाद आपको उसका रिकॉर्डेड वीडियो आपके दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
चढ़ावा सेवा में आप भारत के प्राचीन मंदिरो, शक्तिपीठो में अपने नाम से चढ़ावा/ श्रृंगार/ भोग आदि अर्पित कर सकते है।
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प्रसाद घर पर पहुंचाया जाएगा
मंदिर से प्रामाणिक प्रसाद 7-10 दिनों के भीतर वितरित किया जाएगा।

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