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पितृ पक्ष विशेष: गया 16 तिथि जल-कुश तर्पण एवं दीपदान
पितरों की तृप्ति, शांति एवं पैतृक आशीर्वाद की प्रार्थना के लिए
  • फल्गु नदी तट, गया
  • September 26, Saturday

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4.8

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जल एवं कुश से तर्पण कराएं
पवित्र जल एवं कुश से पितरों का तर्पण कराकर पितृ शांति, तृप्ति एवं पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त करें।
$19
तिल से तर्पण कराएं
पवित्र तिल से पितरों का तर्पण कराकर पितृ दोष से राहत, पूर्वजों की शांति एवं परिवार में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करें।
$21
जल, कुश एवं तिल से तर्पण कराएं
जल, कुश एवं तिल से पितरों का तर्पण कराकर पितृ तृप्ति, दोष शांति, बाधा निवारण एवं परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करें।
$23
जल, कुश तर्पण एवं पितृ स्तोत्र पाठ कराएं
जल एवं कुश से पितृ तर्पण के साथ पितृ स्तोत्र पाठ कराकर पूर्वजों की शांति, पितृ कृपा एवं परिवार में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करें।
$25
जल, कुश, तिल तर्पण एवं पितृ स्तोत्र पाठ कराएं
जल, कुश एवं तिल से पितृ तर्पण के साथ पितृ स्तोत्र पाठ कराकर पितृ दोष शांति, पूर्वजों की तृप्ति, बाधा निवारण एवं परिवार की समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त करें।
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गोत्र
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चढ़ावा के लाभ
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जल-कुश तर्पण के माध्यम से दिवंगत पूर्वजों की शांति और सद्गति की प्रार्थना की जाती है। फल्गु नदी तट पर किया गया यह अर्पण पितरों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का विशेष माध्यम माना जाता है।
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जल, कुशा और श्रद्धापूर्वक स्मरण के माध्यम से ज्ञात-अज्ञात पूर्वजों की तृप्ति की कामना की जाती है। पितृ पक्ष की 16 तिथियों को समर्पित होने के कारण इसका विशेष महत्व माना जाता है।
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पितरों की कृपा से परिवार में शांति, सामंजस्य और सकारात्मकता की प्रार्थना की जाती है। यह चढ़ावा पारिवारिक जीवन में सुख और संतुलन की कामना के साथ अर्पित किया जाता है।
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इस चढ़ावे के माध्यम से परिवार की सुख-समृद्धि, स्थिरता और आने वाली पीढ़ियों की उन्नति की प्रार्थना की जाती है। पूर्वजों के आशीर्वाद को वंश के मंगल से जोड़ा जाता है।
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फल्गु नदी तट पर जल-कुश तर्पण एवं दीपदान के माध्यम से पितरों की कृपा और संरक्षण की प्रार्थना की जाती है। यह चढ़ावा पूरे परिवार पर पैतृक आशीर्वाद की कामना के साथ अर्पित किया जाता है।
चढ़ावा के बारे में
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🙏 पितृ पक्ष की 16 तिथियों का महत्व
सनातन परंपरा में पितृ पक्ष पूर्वजों के स्मरण, श्रद्धा और कृतज्ञता का विशेष काल माना जाता है। इन 16 तिथियों में कुल के ज्ञात-अज्ञात दिवंगत पूर्वजों को स्मरण कर उनकी तृप्ति, शांति और सद्गति की प्रार्थना की जाती है।

🌿 जल-कुश तर्पण क्यों है विशेष?
जल और पवित्र कुशा के माध्यम से पितरों को तर्पण अर्पित करना प्राचीन पितृ परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनकी तृप्ति की कामना का माध्यम माना गया है।

🌊 फल्गु नदी तट पर तर्पण का महत्व
गया की पवित्र फल्गु नदी सदियों से पितृ कर्मों और तर्पण की परंपरा से जुड़ी हुई है। मान्यता है कि पितृ पक्ष के दौरान फल्गु नदी तट पर पूर्वजों के निमित्त जल अर्पित करना विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

🪔 दीपदान का आध्यात्मिक भाव
दीप प्रकाश, स्मरण और श्रद्धा का प्रतीक माना जाता है। पितरों के निमित्त दीप अर्पित कर उनकी शांति, सद्गति और पैतृक कृपा की प्रार्थना की जाती है।

🕉️ पितृ ऋण और कृतज्ञता
सनातन परंपरा में पितृ ऋण हमारे पूर्वजों से प्राप्त जीवन, वंश और संस्कारों के प्रति दायित्व का प्रतीक माना गया है। पितृ पक्ष इस कृतज्ञता को श्रद्धापूर्वक व्यक्त करने का विशेष अवसर है।

🛕 इस चढ़ावे में क्या होगा?
पितृ पक्ष की 16 तिथियों को समर्पित यह विशेष चढ़ावा फल्गु नदी तट, गया में आपके नाम एवं गोत्र से अर्पित किया जाएगा। जल और कुशा से तर्पण तथा पितरों के निमित्त दीपदान के माध्यम से उनकी तृप्ति, परिवार की सुख-शांति, वंश की उन्नति और पैतृक आशीर्वाद की प्रार्थना की जाएगी।

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मंदिर के बारे में
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🌊 पवित्र फल्गु नदी तट
बिहार स्थित गया भारत के प्रमुख पितृ तीर्थों में से एक माना जाता है और यहां की फल्गु नदी पितृ परंपराओं से विशेष रूप से जुड़ी हुई है। सदियों से श्रद्धालु अपने पूर्वजों के निमित्त तर्पण और जल अर्पण के लिए इस पवित्र नदी तट पर आते रहे हैं।

🛕 गया की धार्मिक महिमा
गया की धार्मिक परंपरा भगवान विष्णु और गयासुर से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं से संबंधित है। यहां स्थित विष्णुपद क्षेत्र और फल्गु नदी मिलकर इस तीर्थ को पितरों के निमित्त श्रद्धा अर्पित करने का प्रमुख केंद्र बनाते हैं।

🙏 पितृ पक्ष में विशेष महत्व
पितृ पक्ष के दौरान फल्गु नदी तट पर जल-कुश तर्पण करना पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट करने का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। इस पावन काल में यहां पितरों की तृप्ति और शांति की विशेष प्रार्थना की जाती है।

🪔 दीपदान की परंपरा
फल्गु नदी के पावन तट पर पितरों के निमित्त दीप अर्पित करना स्मरण, श्रद्धा और मंगल की भावना से जुड़ा माना जाता है। यही कारण है कि पितृ पक्ष की 16 तिथियों में यहां जल-कुश तर्पण एवं दीपदान का विशेष आध्यात्मिक महत्व माना जाता है।
 

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
चढ़ावा सेवा में आप भारत के प्राचीन मंदिरो, शक्तिपीठो में अपने नाम से चढ़ावा/ श्रृंगार/ भोग आदि अर्पित कर सकते है।
Via Veda एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो आपको धार्मिक सेवाओं का लाभ उठाने का अवसर देता है। इसके माध्यम से आप चढ़ावा सेवा, गौसेवा, अन्नदान, और मंदिरों के पुनर्निर्माण में योगदान दे सकते हैं। साथ ही, आप अनुभवी ज्योतिषियों से परामर्श कर कुंडली, अंक ज्योतिष और वास्तु जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
चढ़ावा के दिन मानसिक और शारीरिक शुद्धता का ध्यान रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और इष्टदेव का स्मरण करें। चढ़ावा की प्रक्रिया के बारे में आपको पहले से सूचित किया जाएगा, और पूजा के बाद इसका रिकॉर्डेड वीडियो आपको भेजा जाएगा।
यदि आपको चढ़ावा से संबंधित अधिक जानकारी चाहिए, तो आप Via Veda के कस्टमर सपोर्ट नंबर +91 98109 86076 पर संपर्क कर सकते हैं। हमारी टीम आपकी हर संभव सहायता के लिए तत्पर है।
Via Veda एक भरोसेमंद मंच है जो आपको घर बैठे पूजा करने का अवसर प्रदान करता है। आपकी पूजा बुकिंग के बाद, योग्य पुजारियों द्वारा शुभ मुहूर्त में अनुष्ठान संपन्न किया जाता है। इसके बाद, आपके दिए गए पते पर प्रसाद और पुजारी जी द्वारा आपके नाम और गोत्र से की गई चढ़ावा का वीडियो आपके रजिस्टर्ड व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
चढ़ावा बुक होने के बाद, हमारी टीम 24 घंटों के अंदर आपसे संपर्क करेगी और आपका नाम, गोत्र आदि की जानकारी लेगी। आप टीम से चढ़ावा से जुड़ी अन्य जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।
ऑफलाइन और ऑनलाइन चढ़ावा की प्रक्रिया में ज्यादा अंतर नहीं है। दोनों में ही पुजारी आपके नाम और गोत्र से अनुष्ठान करते हैं। अंतर यह है कि ऑफलाइन चढ़ावा में आपको स्वयं मंदिर जाना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन चढ़ावा में आप घर बैठे यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। चढ़ावा का रिकॉर्डेड वीडियो आपको बाद में भेज दिया जाएगा।
हाँ, Via Veda द्वारा करवाई गई चढ़ावा के बाद आपको उसका रिकॉर्डेड वीडियो आपके दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
विशेष चढ़ावा
आध्यात्मिक अनुभव
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पूजा पर लघु दर्शन वीडियो साझा किया जाएगा तिथि. नाम-गोत्र सहित पूरा वीडियो भेजा जाएगा 2-3 दिनों के भीतर व्हाट्सएप पर।
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मंदिर से प्रामाणिक प्रसाद 7-10 दिनों के भीतर वितरित किया जाएगा।

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