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महाशिवरात्रि पर होने वाले इस संयुक्त महापूजा से भगवान शिव व माता पार्वती प्रसन्न होते हैं जिससे भक्त के शीघ्र विवाह के योग बनते हैं और कुंडली से विवाह बाधाएँ दूर होती हैं।
ऐसा माना जाता है कि शिव शक्ति के संयुक्त पूजन का भाव दंपति के बीच की नाराज़गी को धीरे धीरे नरम करने की प्रेरणा देता है, जिससे बातचीत में कोमलता और एक दूसरे को सुनने की भावना बढ़ सकती है।
इस पूजन से जुड़ा आध्यात्मिक वातावरण ऐसा माना जाता है कि मन को शांत करने में सहायक होता है, जिससे पति पत्नी के बीच धैर्य, समझ एवं स्थितियों को बिना तुरंत प्रतिक्रिया दिए संभालने की सोच विकसित हो सकती है।
ऐसा माना जाता है कि यह संयुक्त महापूजा रिश्ते में अधिकार और समर्पण के बीच संतुलन का भाव जगाने की प्रेरणा देती है, जिससे दोनों साथी खुद को अधिक सम्मानित और जुड़ा हुआ महसूस कर सकते हैं।
महाशिवरात्रि के दिन कहते हैं कि यह संयुक्त महापूजा रिश्तों में आई दूरी या अलगाव को समाप्त कर प्रेम और अपनेपन को बढ़ाती है।
त्रियुगीनारायण मंदिर एक अत्यंत दिव्य और सिद्ध स्थल है। यह वही स्थान है जहाँ स्वयं भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। कहा जाता है कि भगवान शिव, माता पार्वती की कोई भी बात नहीं टालते, इसलिए देवी की प्रसन्नता अपने आप शिव की कृपा को आकर्षित करती है। ऐसे में इस स्थान पर महाशिवरात्रि के शुभ अवसर पर की गई महाशिवरात्रि विशेष : शिव शक्ति संयुक्त महापूजा करने से प्रेम और विवाह से संबंधित सभी मनोकामनाओं को शीघ्र पूर्ण करती है। इसलिए इस पवित्र स्थल को मन और रिश्तों के लिए बहुत खास माना जाता है।
संयुक्त महापूजा : दो लोगों का पवित्र बंधन
महाशिवरात्रि के दिन शिव–शक्ति संयुक्त पूजा करना बेहद खास होता है, इसमें भगवान शिव और माता शक्ति से प्रार्थना की जाती है कि दो लोगों के बीच प्यार, समझ और भरोसा बना रहे। यह पूजा पति-पत्नी या पार्टनर के रिश्ते को मजबूत करने का प्रतीक है और एक-दूसरे के साथ जुड़े रहने की भावना बढ़ाती है। आज की भागदौड़ वाली ज़िंदगी में रिश्तों में दूरी, गलतफहमी और तनाव आना आम बात है। कई बार प्यार होने के बावजूद भी मन की बातें नहीं सुलझ पातीं। ऐसी मान्यता है कि त्रियुगीनारायण धाम में ये पूजा करने से मन को शांति मिलती है, धैर्य बढ़ता है और एक-दूसरे को समझने की शक्ति मिलती है। यह कोई गारंटी नहीं, बल्कि श्रद्धा के साथ किया गया प्रयास है, ताकि भगवान शिव और शक्ति के आशीर्वाद से रिश्ते में फिर से सुकून और अपनापन आ सके।
त्रियुगीनारायण मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित एक ऐतिहासिक और पवित्र स्थल है, जो उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के त्रियुगीनारायण गांव में स्थित है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, त्रियुगीनारायण को हिमवत की राजधानी माना जाता था और यहीं पर भगवान शिव और देवी पार्वती का पवित्र विवाह हुआ था। कहा जाता है कि शिव और पार्वती का विवाह इसी विशाल हवन कुंड में हुआ था, जिसमें चारों दिशाओं में अग्नि प्रज्वलित की गई थी। इस दिव्य विवाह समारोह में ब्रह्मा, विष्णु सहित सभी देवताओं और संतों ने भाग लिया था। इस हवन कुंड की राख को आज भी भक्त अपने घर ले जाते हैं, और इसे अपने वैवाहिक जीवन के सुखमय होने के लिए एक आशीर्वाद मानते हैं।
त्रियुगीनारायण नाम इसी कारण पड़ा क्योंकि यहाँ तीन युगों के चिन्ह देखे जाते हैं, जो भगवान विष्णु, शिव और पार्वती के दिव्य संबंधों को दर्शाते हैं। इस मंदिर के परिसर में चार महत्वपूर्ण कुंड स्थित हैं: रुद्राकुंड, विष्णु कुंड, ब्रह्मकुंड और सरस्वती कुंड। इन कुंडों का जल बहुत पवित्र माना जाता है, और यही वह स्थान है जहाँ देवताओं ने शिव-पार्वती के विवाह के दौरान स्नान किया था। विशेष रूप से, सरस्वती कुंड का जल विष्णु की नाभि से उत्पन्न माना जाता है, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है। इसलिए, पाप कर्मों से मुक्ति, वैवाहिक सुख एवं दांपत्य सामंजस्य एवं सुख समृद्धि के लिए चढ़ाया जाने वाला चढ़ावा इस मंदिर में अत्यंत फलदायी माना जाता है।
ViaVeda एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो आपको धार्मिक सेवाओं का लाभ उठाने का अवसर देता है। इसके माध्यम से आप गौसेवा, अन्नदान, और मंदिरों के पुनर्निर्माण में योगदान दे सकते हैं। साथ ही, आप अनुभवी ज्योतिषियों से परामर्श कर कुंडली, अंक ज्योतिष और वास्तु जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
पूजा के दिन मानसिक और शारीरिक शुद्धता का ध्यान रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और इष्टदेव का स्मरण करें। पूजा की प्रक्रिया के बारे में आपको पहले से सूचित किया जाएगा, और पूजा के बाद इसका रिकॉर्डेड वीडियो आपको भेजा जाएगा।
यदि आपको पूजा से संबंधित अधिक जानकारी चाहिए, तो आप ViaVeda के कस्टमर सपोर्ट नंबर +91 98109 86076 पर संपर्क कर सकते हैं। हमारी टीम आपकी हर संभव सहायता के लिए तत्पर है।
ViaVeda एक भरोसेमंद मंच है जो आपको घर बैठे पूजा करने का अवसर प्रदान करता है। आपकी पूजा बुकिंग के बाद, योग्य पुजारियों द्वारा शुभ मुहूर्त में अनुष्ठान संपन्न किया जाता है। इसके बाद, आपके दिए गए पते पर प्रसाद और पुजारी जी द्वारा आपके नाम और गोत्र से की गई पूजा का वीडियो आपके रजिस्टर्ड व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
पूजा बुक होने के बाद, हमारी टीम 24 घंटों के अंदर आपसे संपर्क करेगी और आपका नाम, गोत्र आदि की जानकारी लेगी। आप टीम से पूजा से जुड़ी अन्य जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।
ऑफलाइन और ऑनलाइन पूजा की प्रक्रिया में ज्यादा अंतर नहीं है। दोनों में ही पुजारी आपके नाम और गोत्र से अनुष्ठान करते हैं। अंतर यह है कि ऑफलाइन पूजा में आपको स्वयं मंदिर जाना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन पूजा में आप घर बैठे यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। पूजा का रिकॉर्डेड वीडि यो आपको बाद में भेज दिया जाएगा।
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