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> संकल्प के समय, पंडित जी 1 भक्त का नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
> विशेष सेवाएँ: आप वस्त्र दान, गौ सेवा या चढ़ावा सेवा जैसी विशेष सेवाओं को अपने नाम से जोड़ सकते हैं।
> पूजा और अर्पण का पूरा वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर साझा किया जाएगा।
> नवरात्रि समापन विशेष: देवी नवदुर्गा कुमकुम अर्चन पूजन और पिंडदान का कोई प्रसाद नहीं होता है। इसलिए इस पूजा का प्रसाद आपके घर पर नहीं भेजा जाएगा।
> संकल्प के समय, पंडित जी 2 भक्तों के नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
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> नवरात्रि समापन विशेष: देवी नवदुर्गा कुमकुम अर्चन पूजन का कोई प्रसाद नहीं होता है। इसलिए इस पूजा का प्रसाद आपके घर पर नहीं भेजा जाएगा।
> संकल्प के समय, पंडित जी 6 भक्तों के नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
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> नवरात्रि समापन विशेष: देवी नवदुर्गा कुमकुम अर्चन पूजन का कोई प्रसाद नहीं होता है। इसलिए इस पूजा का प्रसाद आपके घर पर नहीं भेजा जाएगा।
> संकल्प : पूजा के दौरान, पंडित जी भक्तों का नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
> विशेष सेवाएँ: वस्त्र दान, गौ सेवा या चढ़ावा सेवा जैसी पूज्यनीय सेवाओं का चयन कर अपनी आस्था को और विशेष बनाएं आपके नाम से संपन्न की जाएगी।
> निजी पूजा वीडियो: आपकी पूजा और अर्पण का उच्च गुणवत्ता वाला वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
> नवरात्रि समापन विशेष: देवी नवदुर्गा कुमकुम अर्चन पूजन कोई प्रसाद नहीं होता है। इसलिए इस पूजा का प्रसाद आपके घर पर नहीं भेजा जाएगा।
देवी नवदुर्गा को कुमकुम अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस पूजा से जीवन में सौभाग्य, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। माता की कृपा से घर में खुशहाली और उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
कई बार जीवन में बिना कारण रुकावटें, तनाव या नकारात्मकता महसूस होती है। देवी नवदुर्गा कुमकुम अर्चन पूजन से ऐसी बाधाओं को दूर करने और जीवन में नई सकारात्मक शुरुआत के लिए माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
मां दुर्गा मातृ शक्ति का प्रतीक हैं। उनकी आराधना से परिवार में आपसी प्रेम, समझ और सौहार्द बढ़ता है। घर का वातावरण शांत और सुखद बना रहता है।
नवरात्रि समापन के दिन किया गया यह पूजन भक्तों को देवी का विशेष आशीर्वाद प्रदान करता है। माता की कृपा से व्यक्ति को जीवन की चुनौतियों का सामना करने की शक्ति और आत्मविश्वास मिलता है।
श्रद्धा और संकल्प के साथ किया गया कुमकुम अर्चन पूजन मां नवदुर्गा को अत्यंत प्रिय माना जाता है। मान्यता है कि जो भक्त सच्चे मन से यह पूजा करता है, उसकी उचित मनोकामनाएं माता की कृपा से पूर्ण होती हैं।
नवरात्रि का पावन पर्व मां दुर्गा की आराधना का सबसे शुभ समय माना जाता है। नौ दिनों तक देवी के नौ स्वरूपों की पूजा के बाद नवरात्रि का समापन अत्यंत विशेष माना जाता है। इस पावन अवसर पर मां नवदुर्गा को समर्पित कुमकुम अर्चन पूजन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। कुमकुम अर्चन मां दुर्गा की विशेष उपासना का एक पवित्र विधान है, जिसमें माता के चरणों में कुमकुम अर्पित कर उनके नौ स्वरूपों का स्मरण किया जाता है। कुमकुम सौभाग्य, शक्ति और मंगल का प्रतीक माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार श्रद्धा और भक्ति से किया गया कुमकुम अर्चन भक्त के जीवन में सुख, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।
काशी के पावन धाम में स्थित प्राचीन नवदुर्गा मंदिर में यह विशेष पूजन वैदिक मंत्रों और विधि-विधान के साथ संपन्न किया जाएगा। इस पूजन में देवी के नौ स्वरूपों शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री का स्मरण कर माता से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मांगा जाता है। नवरात्रि समापन के दिन यह कुमकुम अर्चन पूजन विशेष रूप से उन भक्तों के लिए शुभ माना जाता है जो अपने जीवन से बाधाओं को दूर कर माता की कृपा और संरक्षण प्राप्त करना चाहते हैं। श्रद्धा और संकल्प के साथ किया गया यह पूजन जीवन में सकारात्मक परिवर्तन और देवी कृपा का माध्यम बनता है।
वाराणसी को भगवान शिव की नगरी कहा जाता है। परंतु जहां शिव हैं वहां माता शक्ति भी विराजमान रहती हैं और वाराणसी में माता शक्ति के नवो रूप विद्यमान है। धर्म नगरी काशी में देवी के कई सिद्ध मंदिर हैं। इस नगरी में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जहां मां दुर्गा नौ रूपों में विराजमान हैं। यहां एक ही विग्रह में नौ देवी के दर्शन होते हैं। सिद्धि ऐसी है कि औरंगजेब भी इस मंदिर को नहीं छू पाया था। सैकड़ों साल पुराने इस मंदिर की कई मान्यताएं हैं। मान्यता है कि यहां मां की प्रतिमा स्थापित नहीं है, बल्कि वह स्वयं विराजित हैं। यहां दर्शन करने आए श्रद्धालुओं का कहना है कि जो भी इस दरबार में आकर श्रद्धापूर्वक अराधना करता है मां उसे शुभाशीष देती हैं।
इस प्राचीन नवदुर्गा मंदिर में माता सभी की मनोकामनाएं पूरी करती हैं। माता शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री इन नौ रूपों में देवी यहां विराजमान हैं। नवरात्र के दिनों में यहां श्रद्धालुओं की भीड़ बड़ी संख्या में जमा होती है। मंदिर के महंत ने बताया कि इस प्राचीन मंदिर की कई मान्यताएं हैं। कहा जाता है कि औरंगजेब काशी में मंदिरों को तुड़वा रहा था उस वक्त भी उसके सैनिक इस मंदिर को नहीं छू पाए थे। मान्यता यह भी है कि माता यहां स्वयंभू हैं और यहां दर्शन करने वालों को नौ देवी के दर्शन प्राप्त होते हैं। श्रद्धालु नौ दिन माता के इस मंदिर में आकर दर्शन कर लें तो उसे नवदुर्गा का आशीर्वाद मिलता है।
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पूजा के दिन मानसिक और शारीरिक शुद्धता का ध्यान रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और इष्टदेव का स्मरण करें। पूजा की प्रक्रिया के बारे में आपको पहले से सूचित किया जाएगा, और पूजा के बाद इसका रिकॉर्डेड वीडियो आपको भेजा जाएगा।
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ऑफलाइन और ऑनलाइन पूजा की प्रक्रिया में ज्यादा अंतर नहीं है। दोनों में ही पुजारी आपके नाम और गोत्र से अनुष्ठान करते हैं। अंतर यह है कि ऑफलाइन पूजा में आपको स्वयं मंदिर जाना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन पूजा में आप घर बैठे यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। पूजा का रिकॉर्डेड वीडि यो आपको बाद में भेज दिया जाएगा।
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