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दक्षिण भारतीय सावन अखंड शिव आराधना
दक्षिण भारत सावन प्रारंभ: 30 दिनों का पशुपतिनाथ महारुद्राभिषेक एवं 1008 बेलपत्र अर्चन

निरोगी काया, सुख-समृद्धि, ग्रह दोषों और सभी कष्टों से मुक्ति के लिए

  • श्री पशुपतिनाथ मंदिर, नेपाल
  • August 13, Thursday

मौका न चूकें - पूजा बुकिंग जल्द ही बंद हो रही है!

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2 लाख+ श्रद्धालु

ने Via Veda द्वारा आयोजित पूजा में भाग लिया है Via Veda

🌿क्या आप चाहते हैं कि पूरे सावन भगवान शिव की कृपा आप पर बनी रहे? इस सावन भगवान शिव की कृपा से अपनी सारी इच्छाओं को पूरी करें।
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🕉️ दक्षिण भारत में सावन कब मनाया जाएगा?

भारत के विभिन्न क्षेत्रों में प्रचलित पंचांग परंपराओं के कारण सावन की तिथियों में अंतर होता है। उत्तर भारत में पूर्णिमांत पंचांग का अनुसरण किया जाता है, जबकि आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, महाराष्ट्र, गोवा और गुजरात सहित कई दक्षिण एवं पश्चिम भारतीय क्षेत्रों में अमांत पंचांग प्रचलित है। दक्षिण भारतीय अमांत पंचांग के अनुसार वर्ष 2026 में पवित्र सावन मास 13 अगस्त से प्रारंभ होकर 11 सितंबर 2026 तक रहेगा। इसी पवित्र अवधि को ध्यान में रखते हुए श्री पशुपतिनाथ मंदिर में यह विशेष 30 दिवसीय महारुद्राभिषेक आयोजित किया जाएगा।

🌿 सावन में रुद्राभिषेक का विशेष महत्व

शिव पुराण की प्रचलित कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने सृष्टि की रक्षा के लिए ग्रहण किया था। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने महादेव पर जल अर्पित किया। इसी धार्मिक मान्यता से सावन में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक की परंपरा को जोड़ा जाता है। सावनमास में शिवलिंग पर जल, दूध और अन्य पवित्र द्रव्य अर्पित करते हुए वैदिक रुद्र मंत्रों का पाठ करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। भक्त इस आराधना के माध्यम से उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति, ग्रह दोषों की शांति, परिवार की उन्नति और भगवान शिव की कृपा के लिए प्रार्थना करते हैं। जब यह रुद्राभिषेक केवल एक दिन नहीं, बल्कि सावन के पूरे 30 दिनों तक किया जाए, तो यह भक्त के संकल्प को प्रतिदिन भगवान शिव के चरणों में समर्पित करने वाला अखंड अनुष्ठान बन जाता है।

🛕 दक्षिण भारत से क्यों विशेष रूप से जुड़ा है पशुपतिनाथ धाम?

श्री पशुपतिनाथ मंदिर केवल नेपाल का पवित्र शिवधाम ही नहीं, बल्कि उत्तर और दक्षिण भारत की वैदिक परंपराओं को जोड़ने वाला एक अद्भुत आध्यात्मिक सेतु भी माना जाता है। इस मंदिर की पुरोहित परंपरा का दक्षिण भारत से अत्यंत गहरा संबंध रहा है। कई शताब्दियों से मंदिर के मुख्य पुजारी परंपरागत रूप से दक्षिण भारत के वेद, आगम, संस्कृत और शैव पूजा-पद्धति में निपुण विद्वान ब्राह्मणों में से नियुक्त किए जाते रहे हैं। इन्हें मंदिर की परंपरा में भट्ट पुजारी कहा जाता है। पशुपतिनाथ धाम की धार्मिक परंपरा को आदि शंकराचार्य की अखिल भारतीय आध्यात्मिक चेतना से भी जोड़ा जाता है। इसलिए दक्षिण भारतीय पंचांग के अनुसार सावन में यहां संपन्न होने वाला महारुद्राभिषेक दक्षिण भारत के शिवभक्तों के लिए विशेष धार्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है।

✨ आदि शंकराचार्य की अखिल भारतीय शिव परंपरा

आदि शंकराचार्य ने भारत के विभिन्न भागों में सनातन धर्म, वेदांत और शिव उपासना की परंपराओं को पुनर्जीवित एवं संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनसे जुड़ी परंपराएं उत्तर में हिमालय से लेकर दक्षिण में श्रृंगेरी और रामेश्वरम तक भारत को एक आध्यात्मिक सूत्र में बांधती हैं। पशुपतिनाथ मंदिर से जुड़ी दक्षिण भारतीय वैदिक पुरोहित परंपरा इसी अखिल भारतीय आध्यात्मिक एकता का प्रतीक मानी जाती है। यहां दक्षिण भारतीय वैदिक विद्वानों द्वारा शिव आराधना संपन्न होना यह दर्शाता है कि महादेव की भक्ति भौगोलिक सीमाओं से परे संपूर्ण भारत को एक सूत्र में जोड़ती है।

🛕 क्यों है पशुपतिनाथ का यह अनुष्ठान इतना विशेष?

नेपाल की राजधानी काठमांडू में पवित्र बागमती नदी के तट पर स्थित श्री पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे प्राचीन और विश्वप्रसिद्ध धामों में से एक माना जाता है। यहां भगवान शिव पशुपतिनाथ के रूप में पूजित हैं—अर्थात समस्त जीव-जगत के स्वामी, रक्षक और मोक्षदाता। मंदिर में विराजमान भगवान पशुपतिनाथ का दिव्य शिवलिंग बहुमुखी स्वरूप वाला है, जो महादेव की सर्वदिशाओं में व्याप्त सत्ता का प्रतीक माना जाता है। दक्षिण भारतीय पंचांग के अनुसार पूरे सावन इस जागृत शिवधाम में आपके नाम एवं गोत्र से प्रतिदिन महारुद्राभिषेक, वैदिक रुद्र मंत्रों का उच्चारण और विशेष प्रार्थना संपन्न की जाएगी।

🪔 इस 30-दिवसीय अनुष्ठान की विशेषताएं

🕉️ पूरे सावन प्रतिदिन महारुद्राभिषेक
🕉️ नाम एवं गोत्र से दैनिक संकल्प
🕉️ वैदिक रुद्र मंत्रों के साथ अभिषेक एवं प्रार्थना
🕉️ स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, ग्रह दोष शांति एवं मानसिक शांति के लिए विशेष प्रार्थना
🕉️ पूरे सावन भगवान शिव की अखंड कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर

🙏 क्यों जुड़ें इस दिव्य अनुष्ठान से?

इस महाअनुष्ठान की सबसे बड़ी विशेषता है सावन की दिव्यता, लगातार 30 दिनों तक होने वाला महारुद्राभिषेक और श्री पशुपतिनाथ मंदिर की जागृत आध्यात्मिक शक्ति—इन तीनों का दुर्लभ संगम। वायावेदा के माध्यम से आप भी इस 30 दिनों का महारुद्राभिषेक एवं 1008 बेलपत्र अर्चन में अपना संकल्प जोड़कर भगवान पशुपतिनाथ से अपने और अपने परिवार के लिए स्वास्थ्य, समृद्धि, मानसिक शांति और अखंड शिव कृपा की प्रार्थना कर सकते हैं। ध्यान रहे 30 दिनों तक प्रतिदिन रूद्राभिषेक होने के पश्चात सावन के अंतिम दिन 1008 बेलपत्र अर्चन किया जाएगा।

श्री पशुपतिनाथ मंदिर, नेपाल
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नेपाल की राजधानी काठमांडू में बागमती नदी के तट पर स्थित श्री पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव के सबसे प्राचीन, जागृत और विश्वविख्यात धामों में से एक है। यह मंदिर भगवान शिव के पशुपतिनाथ स्वरूप को समर्पित है और विश्वभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान पशुपतिनाथ समस्त प्राणियों के पालनकर्ता एवं रक्षक हैं। यहां की गई पूजा-अर्चना से स्वास्थ्य, दीर्घायु, ग्रह दोषों की शांति, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक कल्याण का आशीर्वाद प्राप्त होता है। विशेष रूप से सावन मास में इस मंदिर का महत्व कई गुना बढ़ जाता है, जब देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन एवं रुद्राभिषेक के लिए यहां पहुंचते हैं।

पशुपतिनाथ मंदिर को भगवान शिव की जीवंत उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है। इसलिए यहां संपन्न होने वाले महारुद्राभिषेक और वैदिक अनुष्ठान अत्यंत प्रभावशाली माने जाते हैं तथा श्रद्धालुओं के लिए शिव कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर प्रदान करते हैं।

पूजा के लाभ

उत्तम स्वास्थ्य एवं निरोगी जीवन का आशीर्वाद

भगवान पशुपतिनाथ के समक्ष पूरे सावन संपन्न होने वाला महारुद्राभिषेक उत्तम स्वास्थ्य, रोगों से रक्षा और दीर्घायु की कामना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।

सुख, समृद्धि एवं परिवार की उन्नति

धार्मिक मान्यता है कि भगवान शिव की कृपा से परिवार में सुख, आर्थिक समृद्धि, स्थिरता और जीवन में उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।

ग्रह दोषों एवं जीवन की बाधाओं से राहत

रुद्राभिषेक को ग्रहों के अशुभ प्रभावों को शांत करने तथा जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं और संकटों को कम करने वाला प्रभावशाली अनुष्ठान माना जाता है।

भगवान शिव की विशेष कृपा एवं संरक्षण

पूरे सावन प्रतिदिन होने वाला महारुद्राभिषेक साधक को भगवान शिव की विशेष कृपा, दिव्य संरक्षण तथा आध्यात्मिक सुरक्षा प्रदान करने वाला माना जाता है।

मानसिक शांति, सकारात्मकता एवं आध्यात्मिक उन्नति

वैदिक रुद्र मंत्रों और महारुद्राभिषेक की दिव्य ऊर्जा मन को शांत करने, सकारात्मकता बढ़ाने तथा साधक को आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाने वाली मानी जाती है।

पूजा में कैसे भाग लें?
पूजा चुनें
पूजा और भेट दान का चयन करें जैसे - वस्त्र दान, गौ सेवा, ब्राह्मण भोजन आदि
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पूजा तिथि पर - पूजा वीडियो देखें
पूजा पर लघु दर्शन वीडियो साझा किया जाएगा तिथि. नाम-गोत्र सहित पूरा वीडियो भेजा जाएगा 2-3 दिनों के भीतर व्हाट्सएप पर।
प्रसाद घर पर पहुंचाया जाएगा
मंदिर से प्रामाणिक प्रसाद 7-10 दिनों के भीतर वितरित किया जाएगा।
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मुख्य विशेषताएं

संकल्प के दौरान, हमारे पंडित जी 2 भक्तों के नाम और पारिवारिक गोत्र का उच्चारण करेंगे।

आप अपने नाम से वस्त्र दान, गौ सेवा, या चढ़ावा सेवा जैसे अतिरिक्त विकल्पों को चुन सकते हैं।

आपकी पूजा और चढ़ावे का वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर साझा किया जाएगा।

8-10 दिनों के भीतर, आपको विया वेदा द्वारा मुफ्त में प्रसाद, पवित्र धागा और अन्य पवित्र वस्तुओं के साथ एक दिव्य आशीर्वाद बॉक्स मिलेगा।

पूजा की मुख्य विशेषताएं
उपयोगकर्ताओं की समीक्षाएँ

2 लाख+ श्रद्धालुओं ने Via Veda द्वारा आयोजित पूजा में भाग लिया है।

• 2026/04/16

Vishnu temple rituals looked authentic and beautifully performed throughout today.

• 2026/04/04

Lakshmi puja brought positive feelings and happiness to our family.

• 2025/12/24

Shani puja was good only the video arrived a little late.

• 2026/02/17

Hanuman Ji seva was completed exactly as promised with great care.

• 2025/08/23

The Mahadev puja video filled our hearts with peace and devotion.

• 2025/10/24

लक्ष्मी पूजा का अनुभव परिवार के लिए बहुत शुभ रहा।

• 2025/06/30

माँ काली की पूजा देखकर मन सचमुच भावुक हो गया।

• 2025/10/03

शनि पूजा अच्छी रही, वीडियो थोड़ा देर से मिला लेकिन संतोष हुआ।

• 2026/02/21

हनुमान जी की सेवा पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ हुई।

• 2025/09/29

महादेव की पूजा देखकर मन को बहुत शांति और संतोष मिला।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Via Veda एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो आपको धार्मिक सेवाओं का लाभ उठाने का अवसर देता है। इसके माध्यम से आप गौसेवा, अन्नदान, और मंदिरों के पुनर्निर्माण में योगदान दे सकते हैं। साथ ही, आप अनुभवी ज्योतिषियों से परामर्श कर कुंडली, अंक ज्योतिष और वास्तु जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

पूजा के दिन मानसिक और शारीरिक शुद्धता का ध्यान रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और इष्टदेव का स्मरण करें। पूजा की प्रक्रिया के बारे में आपको पहले से सूचित किया जाएगा, और पूजा के बाद इसका रिकॉर्डेड वीडियो आपको भेजा जाएगा।

यदि आपको पूजा से संबंधित अधिक जानकारी चाहिए, तो आप Via Veda के कस्टमर सपोर्ट नंबर +91 98109 86076  पर संपर्क कर सकते हैं। हमारी टीम आपकी हर संभव सहायता के लिए तत्पर है।

Via Veda एक भरोसेमंद मंच है जो आपको घर बैठे पूजा करने का अवसर प्रदान करता है। आपकी पूजा बुकिंग के बाद, योग्य पुजारियों द्वारा शुभ मुहूर्त में अनुष्ठान संपन्न किया जाता है। इसके बाद, आपके दिए गए पते पर प्रसाद और पुजारी जी द्वारा आपके नाम और गोत्र से की गई  पूजा का वीडियो आपके रजिस्टर्ड व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।

पूजा बुक होने के बाद, हमारी टीम 24 घंटों के अंदर आपसे संपर्क करेगी और आपका नाम, गोत्र आदि की जानकारी लेगी। आप टीम से पूजा से जुड़ी अन्य जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।

ऑफलाइन और ऑनलाइन पूजा की प्रक्रिया में ज्यादा अंतर नहीं है। दोनों में ही पुजारी आपके नाम और गोत्र से अनुष्ठान करते हैं। अंतर यह है कि ऑफलाइन पूजा में आपको स्वयं मंदिर जाना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन पूजा में आप घर बैठे यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। पूजा का रिकॉर्डेड वीडि यो आपको बाद में भेज दिया जाएगा।

हाँ, Via Veda द्वारा करवाई गई पूजा के बाद आपको उसका रिकॉर्डेड वीडियो आपके दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।

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