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सावन सोमवार अरुणाचलम क्षेत्र त्रिविध शिव अनुष्ठान
सावन मासम विशेष: अरुणाचलम क्षेत्र रुद्राभिषेक, 1008 बिल्व अर्चना एवं होमम

भगवान अरुणाचलेश्वर की कृपा, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-शांति और जीवन की बाधाओं से राहत के लिए

  • अरुणाचलम क्षेत्र, तिरुवन्नामलई, तमिलनाडु
  • August 17, Monday

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2 लाख+ श्रद्धालु

ने Via Veda द्वारा आयोजित पूजा में भाग लिया है Via Veda

इस सावन सोमवार भगवान शिव के अग्नि स्वरूप अरुणाचलेश्वर की पावन भूमि पर रुद्राभिषेक, 1008 बिल्व अर्चना एवं होमम से जुड़कर स्वास्थ्य, सुख-शांति, सकारात्मकता और महादेव की विशेष कृपा की प्रार्थना करें।
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🔱 सावन सोमवार पर अरुणाचलेश्वर की पूजा क्यों मानी जाती है विशेष?

सावन भगवान शिव का सबसे प्रिय मास माना जाता है और इस पवित्र मास का प्रत्येक सोमवार शिव आराधना के लिए अत्यंत शुभ होता है। धार्मिक मान्यता है कि सावन सोमवार के दिन श्रद्धापूर्वक रुद्राभिषेक, बिल्वपत्र अर्चना और होमम करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। अरुणाचलम में भगवान शिव को अरुणाचलेश्वर, अर्थात दिव्य अग्नि और अनंत प्रकाश के स्वरूप में पूजा जाता है। इसलिए सावन सोमवार के शुभ अवसर पर इस पवित्र क्षेत्र में की जाने वाली शिव उपासना को विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त है।

यह त्रिविध अनुष्ठान उन भक्तों के लिए विशेष माना जाता है जो जीवन में बार-बार आने वाली बाधाओं, मानसिक अशांति, अस्थिरता, नकारात्मकता अथवा स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं से राहत पाने के लिए भगवान शिव की शरण लेना चाहते हैं। इस पावन अवसर पर आपके नाम एवं गोत्र से भगवान अरुणाचलेश्वर का रुद्राभिषेक, 1008 बिल्वपत्रों से अर्चना और वैदिक होमम संपन्न किया जाएगा।

🔥 अरुणाचलम को भगवान शिव के अनंत अग्नि स्वरूप का धाम क्यों माना जाता है?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, एक बार भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच इस बात को लेकर विवाद हुआ कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। उसी समय भगवान शिव उनके समक्ष अनंत अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट हुए।

भगवान विष्णु उस स्तंभ का आधार खोजने के लिए वराह रूप धारण कर नीचे की ओर गए, जबकि भगवान ब्रह्मा हंस का रूप लेकर उसका शिखर खोजने के लिए ऊपर की ओर गए। बहुत प्रयास करने के बाद भी दोनों उस दिव्य अग्नि स्तंभ का आरंभ या अंत नहीं खोज सके।

इस अनंत ज्योति के माध्यम से भगवान शिव ने अपने सर्वोच्च और असीम स्वरूप का दर्शन कराया। धार्मिक मान्यता है कि यही दिव्य अग्नि स्तंभ बाद में पवित्र अरुणाचल पर्वत के रूप में प्रकट हुआ। इसी कारण अरुणाचलम को भगवान शिव के अनंत प्रकाश, ज्ञान और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का पवित्र केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां भगवान अरुणाचलेश्वर की उपासना करने से अज्ञान और नकारात्मकता का अंधकार दूर होता है तथा भक्त को मानसिक शांति, आत्मिक स्थिरता और आध्यात्मिक प्रकाश प्राप्त होता है।

🕉️ रुद्राभिषेक का आध्यात्मिक महत्व

रुद्राभिषेक भगवान शिव की सर्वाधिक प्रभावशाली वैदिक उपासनाओं में से एक माना जाता है। इसमें भगवान शिव का पवित्र द्रव्यों से अभिषेक करते हुए श्री रुद्रम एवं अन्य वैदिक मंत्रों का पाठ किया जाता है। अभिषेक की निरंतर बहती पवित्र धारा मन की अशांति, जीवन की कठिनाइयों और नकारात्मक भावनाओं को शांत करने का प्रतीक मानी जाती है।

धार्मिक मान्यता है कि रुद्राभिषेक से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और भक्त को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, ग्रह बाधाओं से राहत तथा जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। सावन सोमवार के दिन अरुणाचलम जैसे अग्नि तत्व से जुड़े शिव धाम में किया जाने वाला रुद्राभिषेक विशेष पुण्यदायी माना जाता है।

🌿 भगवान शिव को 1008 बिल्वपत्र अर्पित करने का महत्व

बिल्वपत्र भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। बिल्वपत्र की तीन पत्तियां भगवान शिव के त्रिनेत्र, त्रिशूल और त्रिगुणात्मक स्वरूप का प्रतीक मानी जाती हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धापूर्वक एक बिल्वपत्र अर्पित करना भी भगवान शिव को प्रसन्न करने वाला माना गया है। ऐसे में 1008 बिल्वपत्रों से भगवान अरुणाचलेश्वर की अर्चना भक्त की गहन श्रद्धा, समर्पण और मनोकामना का प्रतीक बन जाती है।

इस विशेष अर्चना के दौरान प्रत्येक बिल्वपत्र भगवान शिव के पवित्र नाम और मंत्रों के साथ अर्पित किया जाएगा। इसके माध्यम से स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, मानसिक शांति, ग्रह बाधाओं की शांति और मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की जाएगी। 1008 बिल्व अर्चना को साधक के जीवन से नकारात्मकता को दूर करने, मन को शांत करने और शिव कृपा प्राप्त करने का विशेष आध्यात्मिक माध्यम माना जाता है।

🔥 होमम का विशेष महत्व

होमम एक पवित्र वैदिक अग्नि अनुष्ठान है, जिसमें मंत्रोच्चारण के साथ दिव्य अग्नि में विशेष सामग्री और आहुतियां समर्पित की जाती हैं। अग्नि को देवताओं तक भक्त की प्रार्थना पहुंचाने वाला दिव्य माध्यम माना गया है। होमम के दौरान दी जाने वाली प्रत्येक आहुति जीवन की नकारात्मकता, बाधाओं और अशुभ प्रभावों को अग्नि में समर्पित करने का प्रतीक होती है।

अरुणाचलम स्वयं भगवान शिव के अग्नि स्वरूप का धाम माना जाता है। इसलिए इस पवित्र क्षेत्र में संपन्न होने वाला होमम विशेष आध्यात्मिक महत्व रखता है। इस अनुष्ठान के माध्यम से परिवार की शांति, सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, आध्यात्मिक सुरक्षा और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के लिए भगवान अरुणाचलेश्वर से प्रार्थना की जाएगी।

✨ रुद्राभिषेक, बिल्व अर्चना और होमम का त्रिविध संयोग

इस विशेष पूजा में भगवान शिव की उपासना तीन पवित्र विधियों से की जाएगी—रुद्राभिषेक, 1008 बिल्व अर्चना और होमम। रुद्राभिषेक के माध्यम से भगवान शिव का अभिषेक कर मानसिक शांति, स्वास्थ्य और जीवन की बाधाओं से राहत की प्रार्थना की जाएगी। 1008 बिल्व अर्चना के माध्यम से भगवान अरुणाचलेश्वर के चरणों में श्रद्धा, समर्पण और मनोकामनाएं अर्पित की जाएंगी।

होमम के माध्यम से वैदिक अग्नि में आहुतियां देकर नकारात्मकता, ग्रह बाधाओं और जीवन की कठिनाइयों की शांति की प्रार्थना की जाएगी। जल, बिल्वपत्र और अग्नि के इस दिव्य संयोग के कारण यह त्रिविध शिव अनुष्ठान सावन सोमवार पर और भी विशेष माना जाता है।

🙏 वायावेदा के माध्यम से पूजा में भाग लें

वायावेदा के माध्यम से आप 17 अगस्त 2026 को अरुणाचलम क्षेत्र में आयोजित इस विशेष अनुष्ठान में अपने नाम एवं गोत्र के संकल्प के साथ भाग ले सकते हैं। आपके संकल्प से भगवान अरुणाचलेश्वर का विधिपूर्वक रुद्राभिषेक, 1008 बिल्वपत्रों से अर्चना और वैदिक होमम संपन्न किया जाएगा।

इस पूजा के माध्यम से आप अपने तथा अपने परिवार के लिए उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, मानसिक शांति, पारिवारिक सुख, ग्रह बाधाओं से राहत, सकारात्मक ऊर्जा और भगवान अरुणाचलेश्वर की विशेष कृपा की प्रार्थना कर सकते हैं।

अरुणाचलम क्षेत्र, तिरुवन्नामलई, तमिलनाडु
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सनातन धर्म में अरुणाचलम तीर्थ क्षेत्र का बहुत महत्व है। माना जाता है कि यही वह स्थान है जहाँ भगवान शिव ने दिव्य अरुणाचलेश्वर लिंगम के रूप में अवतार लिया था, जो उनके अनंत प्रकाश और ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक है। परंपरा के अनुसार, जब भगवान ब्रह्मा और भगवान विष्णु के बीच इस बात पर विवाद हुआ कि कौन श्रेष्ठ है, तो एक दैवीय घोषणा हुई कि जो कोई भी आग के अनंत स्तंभ की शुरुआत या अंत का पता लगाएगा, उसे ही सबसे महान माना जाएगा। भगवान विष्णु ने इसके आधार को खोजने के लिए वराह का रूप धारण किया, जबकि भगवान ब्रह्मा ने इसके शिखर को खोजने के लिए हंस का रूप लिया। दोनों में से कोई भी सफल नहीं हुआ।

इसके बावजूद, भगवान ब्रह्मा ने झूठा दावा किया कि वे जीत गए हैं। इस झूठ से क्रोधित होकर, भगवान शिव ने दिव्य प्रकाश के जलते हुए स्तंभ के रूप में स्वयं को प्रकट किया, जिसकी चमक ने पूरे ब्रह्मांड को हिला दिया। देवताओं द्वारा क्षमा याचना करने के बाद, भगवान शिव ने पवित्र तिरुमलाई पहाड़ी पर भगवान अरुणाचलेश्वर के रूप में स्वयं को स्थापित किया। इस पवित्र पहाड़ी को शिव के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है। माना जाता है कि यहाँ पूजा और पवित्र अनुष्ठानों में भाग लेने से, विशेष रूप से कार्तिकई महादीपम के दौरान, अपार आध्यात्मिक पुण्य की प्राप्ति होती है। हजारों भक्त यहाँ अंधेरे पर प्रकाश की जीत और नकारात्मकता को दूर करने के प्रतीक के रूप में दीपक जलाते हैं। भक्तों का मानना ​​है कि इस पवित्र स्थान की दिव्य ऊर्जा आत्मा को शुद्ध करती है, आध्यात्मिक विकास को बढ़ावा देती है और व्यक्ति के कर्मों का बोझ कम करने में मदद करती है।

पूजा के लाभ

भगवान अरुणाचलेश्वर की विशेष कृपा प्राप्ति

अरुणाचलम के पवित्र क्षेत्र में रुद्राभिषेक, 1008 बिल्व अर्चना और होमम के माध्यम से भगवान अरुणाचलेश्वर की दिव्य कृपा, संरक्षण और सकारात्मक ऊर्जा की प्रार्थना की जाती है।

उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु

रुद्राभिषेक को शरीर, मन और आत्मा के संतुलन के लिए शुभ माना जाता है। इस अनुष्ठान में रोगों से रक्षा, मानसिक मजबूती, उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की विशेष प्रार्थना की जाती है।

Happiness, Peace, and Prosperity

भगवान शिव की त्रिविध उपासना के माध्यम से घर-परिवार में शांति, आपसी प्रेम, स्थिरता, सुख-समृद्धि और सकारात्मक वातावरण की कामना की जाती है।

ग्रह बाधाओं एवं नकारात्मकता से राहत

रुद्राभिषेक और होमम जीवन की बाधाओं, प्रतिकूल ग्रह प्रभावों और नकारात्मक ऊर्जा की शांति के लिए किए जाने वाले प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान माने जाते हैं।

आध्यात्मिक उन्नति एवं मनोकामना पूर्ति

1008 बिल्व अर्चना भगवान शिव के प्रति गहन श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक है। इसके माध्यम से आंतरिक शांति, आध्यात्मिक जागरण और सच्ची मनोकामनाओं की पूर्ति की प्रार्थना की जाती है।

पूजा में कैसे भाग लें?
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पूजा और भेट दान का चयन करें जैसे - वस्त्र दान, गौ सेवा, ब्राह्मण भोजन आदि
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पूजा पर लघु दर्शन वीडियो साझा किया जाएगा तिथि. नाम-गोत्र सहित पूरा वीडियो भेजा जाएगा 2-3 दिनों के भीतर व्हाट्सएप पर।
प्रसाद घर पर पहुंचाया जाएगा
मंदिर से प्रामाणिक प्रसाद 7-10 दिनों के भीतर वितरित किया जाएगा।
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मुख्य विशेषताएं

संकल्प के दौरान, हमारे पंडित जी 2 भक्तों के नाम और पारिवारिक गोत्र का उच्चारण करेंगे।

आप अपने नाम से वस्त्र दान, गौ सेवा, या चढ़ावा सेवा जैसे अतिरिक्त विकल्पों को चुन सकते हैं।

आपकी पूजा और चढ़ावे का वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर साझा किया जाएगा।

8-10 दिनों के भीतर, आपको विया वेदा द्वारा मुफ्त में प्रसाद, पवित्र धागा और अन्य पवित्र वस्तुओं के साथ एक दिव्य आशीर्वाद बॉक्स मिलेगा।

पूजा की मुख्य विशेषताएं
उपयोगकर्ताओं की समीक्षाएँ

2 लाख+ श्रद्धालुओं ने Via Veda द्वारा आयोजित पूजा में भाग लिया है।

• 2026/04/16

Vishnu temple rituals looked authentic and beautifully performed throughout today.

• 2026/04/04

Lakshmi puja brought positive feelings and happiness to our family.

• 2025/12/24

Shani puja was good only the video arrived a little late.

• 2026/02/17

Hanuman Ji seva was completed exactly as promised with great care.

• 2025/08/23

The Mahadev puja video filled our hearts with peace and devotion.

• 2025/10/24

लक्ष्मी पूजा का अनुभव परिवार के लिए बहुत शुभ रहा।

• 2025/06/30

माँ काली की पूजा देखकर मन सचमुच भावुक हो गया।

• 2025/10/03

शनि पूजा अच्छी रही, वीडियो थोड़ा देर से मिला लेकिन संतोष हुआ।

• 2026/02/21

हनुमान जी की सेवा पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ हुई।

• 2025/09/29

महादेव की पूजा देखकर मन को बहुत शांति और संतोष मिला।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Via Veda एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो आपको धार्मिक सेवाओं का लाभ उठाने का अवसर देता है। इसके माध्यम से आप गौसेवा, अन्नदान, और मंदिरों के पुनर्निर्माण में योगदान दे सकते हैं। साथ ही, आप अनुभवी ज्योतिषियों से परामर्श कर कुंडली, अंक ज्योतिष और वास्तु जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

पूजा के दिन मानसिक और शारीरिक शुद्धता का ध्यान रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और इष्टदेव का स्मरण करें। पूजा की प्रक्रिया के बारे में आपको पहले से सूचित किया जाएगा, और पूजा के बाद इसका रिकॉर्डेड वीडियो आपको भेजा जाएगा।

यदि आपको पूजा से संबंधित अधिक जानकारी चाहिए, तो आप Via Veda के कस्टमर सपोर्ट नंबर +91 98109 86076  पर संपर्क कर सकते हैं। हमारी टीम आपकी हर संभव सहायता के लिए तत्पर है।

Via Veda एक भरोसेमंद मंच है जो आपको घर बैठे पूजा करने का अवसर प्रदान करता है। आपकी पूजा बुकिंग के बाद, योग्य पुजारियों द्वारा शुभ मुहूर्त में अनुष्ठान संपन्न किया जाता है। इसके बाद, आपके दिए गए पते पर प्रसाद और पुजारी जी द्वारा आपके नाम और गोत्र से की गई  पूजा का वीडियो आपके रजिस्टर्ड व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।

पूजा बुक होने के बाद, हमारी टीम 24 घंटों के अंदर आपसे संपर्क करेगी और आपका नाम, गोत्र आदि की जानकारी लेगी। आप टीम से पूजा से जुड़ी अन्य जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।

ऑफलाइन और ऑनलाइन पूजा की प्रक्रिया में ज्यादा अंतर नहीं है। दोनों में ही पुजारी आपके नाम और गोत्र से अनुष्ठान करते हैं। अंतर यह है कि ऑफलाइन पूजा में आपको स्वयं मंदिर जाना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन पूजा में आप घर बैठे यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। पूजा का रिकॉर्डेड वीडि यो आपको बाद में भेज दिया जाएगा।

हाँ, Via Veda द्वारा करवाई गई पूजा के बाद आपको उसका रिकॉर्डेड वीडियो आपके दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।

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