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बद्री विष्णु सहस्रनाम पाठ

बद्रीनाथ धाम में की गई प्रार्थना सभी पापों का नाश और आत्मा को आध्यात्मिक शुद्धता प्रदान करती है। भगवान विष्णु (बद्रीनारायण) की कृपा प्राप्त होती है।

  • बद्रीनाथ तीर्थ क्षेत्र, उत्तराखंड
  • October 16, Thursday

मौका न चूकें - पूजा बुकिंग जल्द ही बंद हो रही है!

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2 लाख+ श्रद्धालु

ने Via Veda द्वारा आयोजित पूजा में भाग लिया है Via Veda

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विष्णु सहस्रनाम पाठ सनातन धर्म की सबसे शक्तिशाली और पूजनीय साधनाओं में से एक है।
इसमें भगवान विष्णु के 1000 दिव्य नामों का उच्चारण किया जाता है, जैसा कि महाभारत के अनुशासन पर्व में वर्णित है।
हर नाम भगवान के किसी विशिष्ट गुण, अवतार या शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है — और भक्त के आंतरिक व बाह्य जीवन को रूपांतरित करने की क्षमता रखता है।

जब यह पवित्र अनुष्ठान चारधामों में से एक — बद्री विशाल की दिव्य उपस्थिति में संपन्न होता है, तो इसकी आध्यात्मिक शक्ति कई गुना बढ़ जाती है
हिमालय की शांत और शुद्ध ऊर्जा, अलकनंदा नदी की उपस्थिति और बद्रीनाथ की पवित्रता इस पूजा को अलौकिक बना देती है।


इस पूजा के प्रमुख अनुष्ठान (Key Rituals):

🔸 1. संकल्प (Sankalp) — शुभ भावना का निर्धारण

पुजारी भक्त (या परिवार) का नाम, गोत्र, और इच्छाओं का उच्चारण करते हैं।
यही पूजा की आध्यात्मिक दिशा और उद्देश्य तय करता है — चाहे वह शांति, समृद्धि, रक्षा हो या मोक्ष की प्राप्ति।


🔸 2. विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र पाठ (Vishnu Sahasranama Stotra Path)

पूजा का मुख्य भाग — भगवान विष्णु के 1000 नामों का सामूहिक या व्यक्तिगत जाप।
हर नाम एक मंत्र के समान होता है, जैसे: गोविंद, मधुसूदन, वासुदेव, हरि, अच्युत, अनंत आदि।
यह जाप:

  • वातावरण को शुद्ध करता है

  • नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है

  • आध्यात्मिक चेतना को जाग्रत करता है

  • विष्णु की कृपा व संरक्षण प्रदान करता है


🔸 3. तुलसी अर्चन (Tulsi Archana)

तुलसी भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है।
इस चरण में 108 या उससे अधिक तुलसी के पत्ते भगवान बद्री विशाल के चरणों में अर्पित किए जाते हैं, प्रत्येक नाम के साथ।
यह पूर्ण समर्पण का प्रतीक है और सात्त्विक ऊर्जा को जागृत करता है।


🏞️ यह पूजा दिव्य क्षेत्र — बद्रीनाथ में संपन्न होती है

इस पूजा की विशेषता इसके पवित्र स्थान में निहित है — बद्रीनाथ धाम, जो हिमालय की गोद में स्थित है और भगवान बद्री नारायण का निवास है।
मान्यता है कि स्वयं भगवान विष्णु ने यहाँ तपस्या की थी।
यहाँ की ऊर्जा — ऋषियों की उपस्थिति, अलकनंदा नदी का प्रवाह, और शताब्दियों से होती आ रही भक्ति — इस स्थान को दुर्लभ आध्यात्मिक कंपन प्रदान करती है।


🔚 निष्कर्ष:

विष्णु सहस्रनाम पाठ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है — यह ईश्वर से जुड़ने का एक सेतु है, जो चिकित्सा, सिद्धि, और मुक्ति का मार्ग खोलता है।
जब यह पूजा भक्ति और पवित्रता के साथ बद्रीनाथ धाम में की जाती है, तो यह जीवन को आध्यात्मिक रूप से रूपांतरित करने वाला अनुभव बन जाती है।

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🛕 धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्त्व:

बद्रीनाथ धाम उत्तराखंड की गढ़वाल हिमालय की गोद में स्थित है और यह हिन्दू धर्म के चारधामों (चारधाम यात्रा) एवं भगवान विष्णु के 108 दिव्य देशमों में से एक है। यहाँ की उपासना परंपरा, पौराणिक कथाएँ और वातावरण भक्तों को मोक्ष की ओर ले जाने वाला माना जाता है।


🌿 स्थान व ऊँचाई:
  • समुद्र तल से लगभग 10,300 फीट (3,133 मीटर) की ऊँचाई पर स्थित।

  • पवित्र अलकनंदा नदी के किनारे स्थित यह धाम बर्फ से ढकी पर्वत श्रृंखलाओं और दिव्य प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है।

  • यहाँ तक की यात्रा स्वयं में एक तीर्थ यात्रा है जो प्रकृति की पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा से भरपूर होती है।


🙏 presiding deity (मुख्य विग्रह):
  • यहाँ के प्रमुख देवता भगवान विष्णु “बद्री नारायण” के रूप में विराजमान हैं।

  • भगवान की मूर्ति शालिग्राम शिला से बनी हुई है और पद्मासन में स्थित है।

  • मूर्ति स्वयंभू (स्वतः प्रकट) मानी जाती है और लगभग 1000 वर्ष पुरानी है।

  • उनके साथ नर-नारायण, गरुड़, कुबेर और उद्धव की मूर्तियाँ भी स्थापित हैं।


📜 पौराणिक मान्यता:
  • मान्यता है कि भगवान विष्णु ने यहाँ कठोर तपस्या की थी और देवी लक्ष्मी ने उन्हें बद्री (बेर) वृक्ष बनकर हिमालय की कठोरता से बचाया था। इसी कारण इस स्थान का नाम “बद्रीनाथ” पड़ा।

  • कहा जाता है कि महाभारत के पश्चात पांडव स्वर्गारोहिणी की यात्रा हेतु इसी मार्ग से गुजरे थे।

  • यह धाम नार-नारायण की तपस्थली भी माना जाता है और आदि शंकराचार्य द्वारा पुनः जाग्रत किया गया था।


📚 ऐतिहासिक व आध्यात्मिक महत्त्व:
  • 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का पुनर्निर्माण और पुनरुद्धार किया।

  • यह मंदिर चारधाम यात्रा (बद्रीनाथ, द्वारका, पुरी, रामेश्वरम्) और छोटे चारधाम यात्रा (यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ) दोनों का हिस्सा है।


🕉️ खुलने का समय और तीर्थयात्रा अवधि:
  • मंदिर हर वर्ष अक्षय तृतीया (अप्रैल–मई) को खुलता है और भाई दूज (अक्टूबर–नवंबर) तक दर्शन के लिए खुला रहता है।

  • सर्दियों में भगवान की मूर्ति को जोशीमठ ले जाया जाता है, जहाँ पूजा विधिपूर्वक जारी रहती है।


🧘 आध्यात्मिक वातावरण:
  • नीलकंठ पर्वत, तप्तकुंड (गर्म जल का स्रोत), ब्रह्मा कपाल आदि पवित्र स्थलों से घिरा हुआ है।

  • यह क्षेत्र वेद-मंत्रों की गूंज, दिव्यता और शांति से परिपूर्ण है — मानो धरती और स्वर्ग के बीच एक दिव्य द्वार हो।


🌟 बद्रीनाथ क्यों जाएँ?
  • बद्री विशाल के दर्शन से मोक्ष की प्राप्ति मानी जाती है।

  • मंदिर में प्रवेश से पहले तप्तकुंड में स्नान से पापों का शमन होता है।

  • वह दिव्य शांति और ऊर्जा अनुभव करें जिसने सदियों से ऋषि-मुनियों को यहाँ आकर्षित किया।


🔚 निष्कर्ष:
बद्रीनाथ धाम केवल एक तीर्थस्थल नहीं, बल्कि आत्मा की मुक्ति और ईश्वर से एकाकार होने की पवित्र भूमि है। यहाँ की यात्रा, पूजा, वातावरण और आस्था — सब मिलकर भक्तों को एक अद्वितीय आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करते हैं।

पूजा के लाभ

पापों और कर्मबंधन से मुक्ति

यह पवित्र पाठ आत्मा को जन्मों-जन्मों से संचित पापों और अज्ञात दोषों से मुक्त करता है।
यह कर्मबंधन की ग्रंथियों को खोलकर आंतरिक शुद्धि और आध्यात्मिक स्वतंत्रता की ओर मार्ग प्रशस्त करता है।

रोगों, शत्रुओं और भय से रक्षा

सहस्रनाम की दिव्य ऊर्जा एक अदृश्य आध्यात्मिक कवच का निर्माण करती है।
यह शारीरिक रोगों, नकारात्मक शक्तियों, छिपे हुए शत्रुओं और अज्ञात भय से सुरक्षा प्रदान करती है।
मानसिक व शारीरिक शक्ति को भी बढ़ाती है।

मोक्ष की प्राप्ति और नारायण की कृपा


भगवान विष्णु के 1000 नामों का निरंतर जाप आत्मा को मुक्ति की ओर उन्नत करता है।
यह भक्त को ईश्वर की शाश्वत उपस्थिति से जोड़ता है और नारायण की दिव्य कृपा एवं शांति प्रदान करता है।

 मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन


सहस्रनाम पाठ चंचल मन को स्थिर करता है और तनाव, चिंता तथा अवसाद से मुक्ति दिलाता है।
यह आंतरिक शांति, स्पष्ट सोच और सकारात्मकता को बढ़ावा देता है।

परिवार में सुख-शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार


जहाँ यह पवित्र पाठ होता है, वहाँ दिव्य ऊर्जा का वास होता है।
यह घर के विवादों, कलह और नकारात्मकता को दूर कर प्रेम, एकता और सौहार्द की स्थापना करता है।

पूजा में कैसे भाग लें?
पूजा चुनें
पूजा और भेट दान का चयन करें जैसे - वस्त्र दान, गौ सेवा, ब्राह्मण भोजन आदि
दक्षिणा दें
यूपीआई, कार्ड या नेट बैंकिंग का उपयोग करके सुरक्षित रूप से अपनी दक्षिणा का भुगतान करें.
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प्रसाद का नाम, गोत्र, प्रसाद वितरण पता और पूजा इच्छा दर्ज करें
पूजा तिथि पर - पूजा वीडियो देखें
पूजा पर लघु दर्शन वीडियो साझा किया जाएगा तिथि. नाम-गोत्र सहित पूरा वीडियो भेजा जाएगा 2-3 दिनों के भीतर व्हाट्सएप पर।
प्रसाद घर पर पहुंचाया जाएगा
मंदिर से प्रामाणिक प्रसाद 7-10 दिनों के भीतर वितरित किया जाएगा।
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मुख्य विशेषताएं

संकल्प के दौरान, हमारे पंडित जी 2 भक्तों के नाम और पारिवारिक गोत्र का उच्चारण करेंगे।

आप अपने नाम से वस्त्र दान, गौ सेवा, या चढ़ावा सेवा जैसे अतिरिक्त विकल्पों को चुन सकते हैं।

आपकी पूजा और चढ़ावे का वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर साझा किया जाएगा।

8-10 दिनों के भीतर, आपको विया वेदा द्वारा मुफ्त में प्रसाद, पवित्र धागा और अन्य पवित्र वस्तुओं के साथ एक दिव्य आशीर्वाद बॉक्स मिलेगा।

पूजा की मुख्य विशेषताएं
उपयोगकर्ताओं की समीक्षाएँ

2 लाख+ श्रद्धालुओं ने Via Veda द्वारा आयोजित पूजा में भाग लिया है।

• 2026/04/16

Vishnu temple rituals looked authentic and beautifully performed throughout today.

• 2026/04/04

Lakshmi puja brought positive feelings and happiness to our family.

• 2025/12/24

Shani puja was good only the video arrived a little late.

• 2026/02/17

Hanuman Ji seva was completed exactly as promised with great care.

• 2025/08/23

The Mahadev puja video filled our hearts with peace and devotion.

• 2025/10/24

लक्ष्मी पूजा का अनुभव परिवार के लिए बहुत शुभ रहा।

• 2025/06/30

माँ काली की पूजा देखकर मन सचमुच भावुक हो गया।

• 2025/10/03

शनि पूजा अच्छी रही, वीडियो थोड़ा देर से मिला लेकिन संतोष हुआ।

• 2026/02/21

हनुमान जी की सेवा पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ हुई।

• 2025/09/29

महादेव की पूजा देखकर मन को बहुत शांति और संतोष मिला।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Via Veda एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो आपको धार्मिक सेवाओं का लाभ उठाने का अवसर देता है। इसके माध्यम से आप गौसेवा, चढ़ावा सेवा, अन्नदान, और मंदिरों के पुनर्निर्माण में योगदान दे सकते हैं। साथ ही, आप अनुभवी ज्योतिषियों से परामर्श कर कुंडली, अंक ज्योतिष और वास्तु जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

पूजा के दिन मानसिक और शारीरिक शुद्धता का ध्यान रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और इष्टदेव का स्मरण करें। पूजा की प्रक्रिया के बारे में आपको पहले से सूचित किया जाएगा, और पूजा के बाद इसका रिकॉर्डेड वीडियो आपको भेजा जाएगा।

यदि आपको पूजा से संबंधित अधिक जानकारी चाहिए, तो आप Via Veda के कस्टमर सपोर्ट नंबर +91 98109 86076  पर संपर्क कर सकते हैं। हमारी टीम आपकी हर संभव सहायता के लिए तत्पर है।

 

 

Via Veda एक भरोसेमंद मंच है जो आपको घर बैठे पूजा करने का अवसर प्रदान करता है। आपकी पूजा बुकिंग के बाद, योग्य पुजारियों द्वारा शुभ मुहूर्त में अनुष्ठान संपन्न किया जाता है। इसके बाद, आपके दिए गए पते पर प्रसाद और पुजारी जी द्वारा आपके नाम और गोत्र से की गई  पूजा का वीडियो आपके रजिस्टर्ड व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।

पूजा बुक होने के बाद, हमारी टीम 24 घंटों के अंदर आपसे संपर्क करेगी और आपका नाम, गोत्र आदि की जानकारी लेगी। आप टीम से पूजा से जुड़ी अन्य जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।

ऑफलाइन और ऑनलाइन पूजा की प्रक्रिया में ज्यादा अंतर नहीं है। दोनों में ही पुजारी आपके नाम और गोत्र से अनुष्ठान करते हैं। अंतर यह है कि ऑफलाइन पूजा में आपको स्वयं मंदिर जाना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन पूजा में आप घर बैठे यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। पूजा का रिकॉर्डेड वीडियो आपको बाद में भेज दिया जाएगा।

हाँ, Via Veda द्वारा करवाई गई पूजा के बाद आपको उसका रिकॉर्डेड वीडियो आपके दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।

चढ़ावा सेवा में आप भारत के प्राचीन मंदिरो, शक्तिपीठो में अपने नाम से चढ़ावा/ श्रृंगार/ भोग आदि अर्पित कर सकते है।

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