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पूर्वजों की आत्मा की शांति और गृह क्लेश से मुक्ति
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> संकल्प के समय, पंडित जी 1 भक्त का नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
> विशेष सेवाएँ: आप वस्त्र दान, गौ सेवा या चढ़ावा सेवा जैसी विशेष सेवाओं को अपने नाम से जोड़ सकते हैं।
> पूजा और अर्पण का पूरा वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर साझा किया जाएगा।
> पितृदोष की पूजा का कोई प्रसाद नहीं होता है। इसलिए इस पूजा का प्रसाद आपके घर पर नहीं भेजा जाएगा।
> संकल्प के समय, पंडित जी 2 भक्तों के नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
> विशेष सेवाएँ: आप वस्त्र दान, गौ सेवा या चढ़ावा सेवा जैसी विशेष सेवाओं को अपने नाम से जोड़ सकते हैं।
> पूजा और अर्पण का पूरा वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर साझा किया जाएगा।
> पितृदोष की पूजा का कोई प्रसाद नहीं होता है। इसलिए इस पूजा का प्रसाद आपके घर पर नहीं भेजा जाएगा।
> संकल्प के समय, पंडित जी 6 भक्तों के नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
> विशेष सेवाएँ: आप वस्त्र दान, गौ सेवा या चढ़ावा सेवा जैसी विशेष सेवाओं को अपने नाम से जोड़ सकते हैं।
> पूजा और अर्पण का पूरा वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर साझा किया जाएगा।
> पितृदोष की पूजा का कोई प्रसाद नहीं होता है। इसलिए इस पूजा का प्रसाद आपके घर पर नहीं भेजा जाएगा।
> संकल्प : पूजा के दौरान, पंडित जी भक्तों का नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
> विशेष सेवाएँ: वस्त्र दान, गौ सेवा या चढ़ावा सेवा जैसी पूज्यनीय सेवाओं का चयन कर अपनी आस्था को और विशेष बनाएं आपके नाम से संपन्न की जाएगी।
> निजी पूजा वीडियो: आपकी पूजा और अर्पण का उच्च गुणवत्ता वाला वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
> पितृदोष की पूजा का कोई प्रसाद नहीं होता है। इसलिए इस पूजा का प्रसाद आपके घर पर नहीं भेजा जाएगा।
शास्त्रों में माना गया है कि जब पूर्वज संतुष्ट नहीं होते, तो जीवन में बार-बार रुकावटें, मानसिक तनाव, आर्थिक परेशानियां और पारिवारिक अशांति बढ़ने लगती है। अमावस्या पर की गई यह विशेष पितृ शांति पूजा पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करने और पितृ दोष के प्रभाव को कम करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।
मान्यता है कि पितरों का आशीर्वाद मिलने पर घर का वातावरण सकारात्मक और शांत होने लगता है। यह पूजा परिवार में बढ़ते विवाद, तनाव और मनमुटाव को शांत कर प्रेम, सामंजस्य और सुख-शांति स्थापित करने में सहायक मानी जाती है।
अमावस्या पर हर की पौड़ी में किया गया तर्पण, पूजा और गंगा आरती पितरों तक पहुंचकर उन्हें संतुष्टि और शांति प्रदान करने वाला माना जाता है। जब पूर्वज प्रसन्न होते हैं, तो उनका आशीर्वाद परिवार पर सुरक्षा कवच की तरह बना रहता है और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आने लगते हैं।
कई बार बिना कारण कार्यों का रुक जाना, मेहनत के बाद भी सफलता न मिलना या बार-बार समस्याओं का आना पितृ दोष से जुड़ा माना जाता है। यह विशेष पूजा जीवन की अदृश्य बाधाओं को शांत कर सफलता और उन्नति के मार्ग खोलने में सहायक मानी जाती है।
हर की पौड़ी की दिव्य गंगा आरती और वैदिक मंत्रों का प्रभाव साधक के मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। यह पूजा मानसिक तनाव, भय और नकारात्मकता को कम कर आत्मिक शांति और आध्यात्मिक संतुलन प्रदान करने वाली मानी जाती है।
सनातन धर्म में माना गया है कि जब पूर्वज असंतुष्ट होते हैं, तो उसका प्रभाव परिवार के सुख, शांति, स्वास्थ्य और उन्नति पर पड़ सकता है। इसी कारण पितरों की शांति और उनके आशीर्वाद के लिए अमावस्या तिथि को अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, अमावस्या का दिन पितरों को समर्पित माना जाता है, क्योंकि इस तिथि पर किया गया तर्पण, पिंडदान, दान और पूजा सीधे पूर्वजों तक पहुंचती है। मान्यता है कि अमावस्या पर श्रद्धा से की गई पितृ पूजा पूर्वजों की आत्मा को शांति प्रदान करती है और साधक को पितृ दोष तथा अदृश्य बाधाओं से राहत दिलाने में सहायक होती है। यही कारण है कि ऋषि-मुनियों ने अमावस्या को पितृ कार्यों के लिए सबसे उत्तम तिथि बताया है। इसी पावन अवसर पर हरिद्वार के पवित्र हर की पौड़ी में पितृ दोष शांति पूजा एवं गंगा आरती का विशेष आयोजन किया जा रहा है।
हर की पौड़ी को वह दिव्य स्थान माना जाता है जहां स्वयं माँ गंगा का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है। मान्यता है कि यहां की गई प्रार्थना और गंगा पूजन कई गुना अधिक फलदायी होता है। विशेष रूप से पितरों की शांति के लिए हरिद्वार में किया गया अनुष्ठान अत्यंत प्रभावशाली माना जाता है। इस विशेष पूजा में साधक के नाम से संकल्प लेकर वैदिक मंत्रों के साथ पितृ दोष शांति पूजा, तर्पण और दिव्य गंगा आरती संपन्न की जाएगी। पूर्वजों की आत्मा की शांति, परिवार में सुख-शांति, गृह क्लेश से मुक्ति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के लिए विशेष प्रार्थना की जाएगी। मान्यता है कि जब पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, तो घर में शांति बढ़ती है, रुके हुए कार्य बनने लगते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग खुलने लगता है।
हरिद्वार स्थित हर की पौड़ी सनातन धर्म के सबसे पवित्र और दिव्य तीर्थ स्थलों में से एक मानी जाती है। मान्यता है कि यही वह पावन स्थान है जहां स्वयं भगवान विष्णु (हरि) के चरण पड़े थे, इसलिए इसे “हरि की पौड़ी” कहा जाता है। गंगा नदी का यह घाट सदियों से आस्था, मोक्ष और आध्यात्मिक साधना का प्रमुख केंद्र रहा है। कहा जाता है कि यहां मां गंगा का जल विशेष रूप से पवित्र और दिव्य ऊर्जा से युक्त माना जाता है, इसलिए हर की पौड़ी में स्नान, पूजा और तर्पण करने से पापों का नाश और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है। हर की पौड़ी विशेष रूप से पितृ तर्पण, गंगा आरती और मोक्ष प्राप्ति से जुड़ी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि यहां श्रद्धा से की गई प्रार्थना और पूर्वजों के लिए किया गया तर्पण सीधे पितरों तक पहुंचता है और उन्हें शांति प्रदान करता है। शाम के समय होने वाली भव्य गंगा आरती को अत्यंत दिव्य अनुभव माना जाता है, जहां हजारों दीपों की रोशनी, मंत्रोच्चार और गंगा की पावन धारा वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देती है। यही कारण है कि हर की पौड़ी को केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि आस्था, शांति और दिव्य कृपा का जीवंत केंद्र माना जाता है।
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पूजा के दिन मानसिक और शारीरिक शुद्धता का ध्यान रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और इष्टदेव का स्मरण करें। पूजा की प्रक्रिया के बारे में आपको पहले से सूचित किया जाएगा, और पूजा के बाद इसका रिकॉर्डेड वीडियो आपको भेजा जाएगा।
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ऑफलाइन और ऑनलाइन पूजा की प्रक्रिया में ज्यादा अंतर नहीं है। दोनों में ही पुजारी आपके नाम और गोत्र से अनुष्ठान करते हैं। अंतर यह है कि ऑफलाइन पूजा में आपको स्वयं मंदिर जाना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन पूजा में आप घर बैठे यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। पूजा का रिकॉर्डेड वीडि यो आपको बाद में भेज दिया जाएगा।
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