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पितृ दोष शांति, मोक्ष प्राप्ति एवं परिवार की सुख-समृद्धि के लिए
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2 लाख+ श्रद्धालु
ने Via Veda द्वारा आयोजित पूजा में भाग लिया है Via Veda
🙏 पितृ पक्ष दशमी श्राद्ध का क्या महत्व है?
सनातन परंपरा में पितृ पक्ष की प्रत्येक तिथि पूर्वजों के श्राद्ध एवं तर्पण के लिए विशेष मानी जाती है। दशमी श्राद्ध मुख्य रूप से उन दिवंगत पूर्वजों के निमित्त किया जाता है, जिनका देहावसान दशमी तिथि को हुआ हो। इस दिन श्रद्धापूर्वक पितरों का स्मरण कर श्राद्ध एवं तर्पण के माध्यम से उनकी आत्मा की तृप्ति, शांति और सद्गति की प्रार्थना की जाती है। पितरों की तृप्ति की कामना के साथ परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और आने वाली पीढ़ियों पर उनके आशीर्वाद की प्रार्थना भी की जाती है।
🌿 तिल तर्पण का क्या महत्व है?
तिल तर्पण पितृ कर्म का प्रमुख अंग माना जाता है। इसमें पूर्वजों का स्मरण करते हुए जल और काले तिल श्रद्धापूर्वक अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक परंपरा में तिल को पितृ कर्म के लिए विशेष पवित्र माना गया है।
दशमी श्राद्ध पर तिल तर्पण के माध्यम से दिवंगत पूर्वजों की तृप्ति, शांति एवं सद्गति और परिवार पर उनकी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की जाएगी।
🪔 पितरों के निमित्त दीपदान क्यों किया जाता है?
सनातन परंपरा में दीप प्रकाश, शांति और शुभता का प्रतीक माना जाता है। पितरों के निमित्त दीपदान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने और उनकी सद्गति की प्रार्थना करने का पवित्र माध्यम माना गया है। इस अनुष्ठान में पितरों के नाम से दीप प्रज्वलित कर उनकी आत्मा की शांति और सद्गति के साथ परिवार में सुख-शांति, सकारात्मकता और पैतृक कृपा की प्रार्थना की जाएगी।
🙏 इस विशेष पितृ अनुष्ठान में क्या होगा?
पितृ पक्ष दशमी श्राद्ध के पावन अवसर पर मुक्तिनाथ तीर्थ स्थल में आपके नाम एवं गोत्र से संकल्प लेकर पितृ दोष निवारण महापूजा संपन्न की जाएगी। विधिपूर्वक पितृ स्मरण एवं पूजन के साथ जल और तिल से तर्पण किया जाएगा तथा पूर्वजों के निमित्त दीपदान संपन्न होगा। इस अनुष्ठान के माध्यम से पितृ दोष की शांति, पूर्वजों की तृप्ति एवं सद्गति, पारिवारिक बाधाओं से राहत, परिवार की सुख-समृद्धि और आने वाली पीढ़ियों पर पितरों की कृपा एवं संरक्षण के लिए विशेष प्रार्थना की जाएगी।
नेपाल के Mustang क्षेत्र में हिमालय के बीच लगभग 3,800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित मुक्तिनाथ मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित पवित्र तीर्थ है। इसे मुक्ति क्षेत्र कहा जाता है, क्योंकि भगवान विष्णु को पापों, सांसारिक बंधनों और जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्रदान करने वाला माना जाता है। काली गंडकी नदी से प्राप्त शालिग्राम शिला को वैष्णव परंपरा में भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है। मंदिर के निकट स्थित 108 पवित्र जलधाराएं आत्मिक शुद्धि, पापक्षालन और समर्पण का प्रतीक मानी जाती हैं। हिंदू और बौद्ध—दोनों परंपराओं में पूजनीय मुक्तिनाथ एक प्राचीन और अद्वितीय आध्यात्मिक तीर्थ है।
पितृ पक्ष में मुक्तिनाथ का महत्व और बढ़ जाता है। भगवान विष्णु को मोक्ष एवं सद्गति प्रदान करने वाला माना जाता है, जबकि पितृ कर्मों का उद्देश्य पूर्वजों की तृप्ति, शांति और उत्तम गति के लिए प्रार्थना करना है। इसलिए मुक्तिनाथ में तिल तर्पण, दीपदान और पितृ शांति पूजा पितृ दोष निवारण, पितृ शांति एवं पैतृक आशीर्वाद की प्रार्थना के लिए विशेष अवसर बनती है।
Therefore, Til Tarpan, Deepdaan and Pitru Shanti Puja at Muktinath offer a special opportunity to pray for Pitru Dosha Shanti, ancestral peace and blessings.
पितृ दोष निवारण महापूजा एवं तिल तर्पण के माध्यम से पितृ दोष से जुड़े प्रतिकूल प्रभावों की शांति और परिवार के कल्याण के लिए प्रार्थना की जाएगी।
दशमी श्राद्ध पर मुक्तिनाथ में तर्पण एवं पितृ पूजा के माध्यम से दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की तृप्ति, शांति और सद्गति की कामना की जाएगी।
मुक्तिनाथ मोक्ष तीर्थ में श्रद्धापूर्वक किए जाने वाले पितृ कर्म एवं दीपदान के माध्यम से पूर्वजों की मुक्ति एवं मोक्ष के लिए प्रार्थना की जाएगी।
पितरों की तृप्ति की कामना के साथ परिवार में बनी बाधाओं और अशांति से राहत तथा सुख, स्थिरता एवं समृद्धि के लिए प्रार्थना की जाएगी।
पूर्वजों के निमित्त संपन्न इस अनुष्ठान के माध्यम से परिवार और आने वाली पीढ़ियों पर पितरों की कृपा, संरक्षण और आशीर्वाद की प्रार्थना की जाएगी।





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संकल्प के दौरान, हमारे पंडित जी 2 भक्तों के नाम और पारिवारिक गोत्र का उच्चारण करेंगे।
आप अपने नाम से वस्त्र दान, गौ सेवा, या चढ़ावा सेवा जैसे अतिरिक्त विकल्पों को चुन सकते हैं।
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Vishnu temple rituals looked authentic and beautifully performed throughout today.
Lakshmi puja brought positive feelings and happiness to our family.
Shani puja was good only the video arrived a little late.
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लक्ष्मी पूजा का अनुभव परिवार के लिए बहुत शुभ रहा।
माँ काली की पूजा देखकर मन सचमुच भावुक हो गया।
शनि पूजा अच्छी रही, वीडियो थोड़ा देर से मिला लेकिन संतोष हुआ।
हनुमान जी की सेवा पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ हुई।
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पूजा के दिन मानसिक और शारीरिक शुद्धता का ध्यान रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और इष्टदेव का स्मरण करें। पूजा की प्रक्रिया के बारे में आपको पहले से सूचित किया जाएगा, और पूजा के बाद इसका रिकॉर्डेड वीडियो आपको भेजा जाएगा।
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Via Veda एक भरोसेमंद मंच है जो आपको घर बैठे पूजा करने का अवसर प्रदान करता है। आपकी पूजा बुकिंग के बाद, योग्य पुजारियों द्वारा शुभ मुहूर्त में अनुष्ठान संपन्न किया जाता है। इसके बाद, आपके दिए गए पते पर प्रसाद और पुजारी जी द्वारा आपके नाम और गोत्र से की गई पूजा का वीडियो आपके रजिस्टर्ड व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
पूजा बुक होने के बाद, हमारी टीम 24 घंटों के अंदर आपसे संपर्क करेगी और आपका नाम, गोत्र आदि की जानकारी लेगी। आप टीम से पूजा से जुड़ी अन्य जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।
ऑफलाइन और ऑनलाइन पूजा की प्रक्रिया में ज्यादा अंतर नहीं है। दोनों में ही पुजारी आपके नाम और गोत्र से अनुष्ठान करते हैं। अंतर यह है कि ऑफलाइन पूजा में आपको स्वयं मंदिर जाना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन पूजा में आप घर बैठे यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। पूजा का रिकॉर्डेड वीडि यो आपको बाद में भेज दिया जाएगा।
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