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पापों का नाश, मोक्ष की प्राप्ति एवं मनोकामना पूर्ति के लिए
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2 लाख+ श्रद्धालु
ने Via Veda द्वारा आयोजित पूजा में भाग लिया है Via Veda
सनातन धर्म में देवशयनी एकादशी को वर्ष की सबसे महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इसी पावन तिथि से भगवान श्रीहरि विष्णु चार माह के लिए योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और यहीं से चातुर्मास का शुभारंभ होता है। मान्यता है कि देवशयनी एकादशी पर की गई पूजा, जप, दान और भगवान विष्णु की आराधना सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक पुण्य और शुभ फल प्रदान करती है। इसलिए इसे भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त करने का अंतिम और अत्यंत दुर्लभ अवसर भी माना जाता है।
इसी दिव्य अवसर पर धरती के वैकुंठ कहे जाने वाले श्री बद्रीनाथ धाम में श्री विष्णु सहस्रनाम पाठ एवं तुलसी दल अर्चन का विशेष आयोजन किया जा रहा है। श्री विष्णु सहस्रनाम महाभारत के अनुशासन पर्व में वर्णित भगवान विष्णु के एक हजार दिव्य नामों का पावन स्तोत्र है। मान्यता है कि इसके श्रद्धापूर्वक पाठ से पापों का क्षय होता है, मानसिक शांति प्राप्त होती है, जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। वहीं तुलसी दल अर्चन भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय माना गया है। शास्त्रों में कहा गया है कि तुलसी के एक पवित्र पत्र से भी यदि श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा की जाए, तो वे शीघ्र प्रसन्न होकर भक्त की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।
इस विशेष अनुष्ठान में साधक के नाम से संकल्प लेकर श्री विष्णु सहस्रनाम का विधिवत पाठ तथा 108 पवित्र तुलसी दलों से भगवान बद्री विशाल का अर्चन किया जाएगा। भगवान विष्णु से प्रार्थना की जाएगी कि वे साधक के जीवन से पाप, दुख और बाधाओं का नाश कर सुख, समृद्धि, मनोकामना सिद्धि और अंततः मोक्ष का आशीर्वाद प्रदान करें। यदि आप भगवान विष्णु की विशेष कृपा, आध्यात्मिक उन्नति, जीवन में सुख-समृद्धि और पापों से मुक्ति की कामना रखते हैं, तो देवशयनी एकादशी का यह दुर्लभ अवसर आपके लिए अत्यंत शुभ और पुण्यदायी सिद्ध हो सकता है।
उत्तराखण्ड में अलकनंदा नदी के पावन तट पर स्थित श्री बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु के प्रमुख तीर्थों में से एक है, जिसे धरती का बैकुंठ कहा जाता है। यह चारधाम एवं छोटा चारधाम यात्रा का अत्यंत महत्वपूर्ण धाम है। धार्मिक मान्यता है कि यहां भगवान बद्रीविशाल के दर्शन एवं पूजा-अर्चना करने से पापों का नाश, आध्यात्मिक उन्नति तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। बद्रीनाथ धाम भगवान विष्णु के 108 दिव्य देशमों (दिव्य देशम्) में भी सम्मिलित है। यहां स्थित तप्त कुंड, ब्रह्म कपाल और नर-नारायण पर्वत इस तीर्थ की आध्यात्मिक महिमा को और अधिक बढ़ाते हैं। सदियों से लाखों श्रद्धालु भगवान विष्णु की कृपा, पापों से मुक्ति, पारिवारिक सुख तथा मोक्ष की कामना लेकर इस दिव्य धाम में दर्शन करने आते हैं।
हिंदू धर्म में मान्यता है कि बद्रीनाथ को मोक्ष धाम भी कहते हैं, मान्यता है कि इनके दर्शन मात्र से व्यक्ति जीवन-मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। बद्रीनाथ में स्थित ‘ब्रह्म कपाल’ स्थान पितरों के तर्पण के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है, जहाँ पांडवों ने भी अपने पितरों का पिंडदान किया था। मन्दिर के पास ही स्थित तप्त कुंड का पानी अत्यधिक ठंड में भी हमेशा गर्म रहता है, जिसमें स्नान करना पाप मुक्ति के लिए अनिवार्य माना जाता है।
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की आराधना अत्यंत पुण्यदायी मानी गई है। मान्यता है कि श्री विष्णु सहस्रनाम के पाठ से साधक के पापों का क्षय होता है और आध्यात्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।
तुलसी दल अर्पित कर श्रद्धापूर्वक की गई पूजा से भगवान विष्णु शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्त की सच्ची एवं शुभ मनोकामनाओं को पूर्ण करने का आशीर्वाद प्रदान करते हैं।
शास्त्रों के अनुसार देवशयनी एकादशी पर किया गया विष्णु पूजन साधक को मोक्ष के मार्ग पर अग्रसर करने वाला तथा आत्मिक उन्नति प्रदान करने वाला माना गया है।
भगवान विष्णु की कृपा से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं, कार्यों में सफलता मिलती है और घर-परिवार में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास होता है।
श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ मन को स्थिर करता है, नकारात्मक विचारों को दूर करता है तथा साधक को भगवान विष्णु के दिव्य संरक्षण और आंतरिक शांति का अनुभव कराता है।





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लक्ष्मी पूजा का अनुभव परिवार के लिए बहुत शुभ रहा।
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