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सर्प (नाग) दोष के बुरे प्रभावों को दूर करने और पिछले जन्मों के पापों से मुक्ति के लिए
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4.6
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> संकल्प के समय, पंडित जी 1 भक्त का नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
> विशेष सेवाएँ: आप वस्त्र दान, गौ सेवा या चढ़ावा सेवा जैसी विशेष सेवाओं को अपने नाम से जोड़ सकते हैं।
> पूजा और अर्पण का पूरा वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर साझा किया जाएगा।
> 8–10 दिनों के भीतर, आपको प्रसाद, रक्षा सूत्र और अन्य पवित्र वस्तुओं से युक्त दिव्य आशीर्वाद बॉक्स नि:शुल्क Via Veda द्वारा आपके पते पर भेजा जाएगा।
> संकल्प के समय, पंडित जी 2 भक्तों के नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
> विशेष सेवाएँ: आप वस्त्र दान, गौ सेवा या चढ़ावा सेवा जैसी विशेष सेवाओं को अपने नाम से जोड़ सकते हैं।
> पूजा और अर्पण का पूरा वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर साझा किया जाएगा।
> श्री हनुमंत बलवंंत विजयप्रद केला-पान अर्पण पूजा का कोई प्रसाद नहीं होता है। इसलिए इस पूजा का प्रसाद आपके घर पर नहीं भेजा जाएगा।
> संकल्प के समय, पंडित जी 6 भक्तों के नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
> विशेष सेवाएँ: आप वस्त्र दान, गौ सेवा या चढ़ावा सेवा जैसी विशेष सेवाओं को अपने नाम से जोड़ सकते हैं।
> पूजा और अर्पण का पूरा वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर साझा किया जाएगा।
> श्री हनुमंत बलवंंत विजयप्रद केला-पान अर्पण पूजा का कोई प्रसाद नहीं होता है। इसलिए इस पूजा का प्रसाद आपके घर पर नहीं भेजा जाएगा।

> संकल्प : पूजा के दौरान, पंडित जी भक्तों का नाम और गोत्र श्रद्धापूर्वक उच्चारित करेंगे।
> विशेष सेवाएँ: वस्त्र दान, गौ सेवा या चढ़ावा सेवा जैसी पूज्यनीय सेवाओं का चयन कर अपनी आस्था को और विशेष बनाएं आपके नाम से संपन्न की जाएगी।
> निजी पूजा वीडियो: आपकी पूजा और अर्पण का उच्च गुणवत्ता वाला वीडियो आपके व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
> श्री हनुमंत बलवंंत विजयप्रद केला-पान अर्पण पूजा कोई प्रसाद नहीं होता है। इसलिए इस पूजा का प्रसाद आपके घर पर नहीं भेजा जाएगा।
आश्लेषा नागबलि पूजा का मुख्य उद्देश्य कुंडली में उपस्थित नाग दोष या सर्प दोष के अशुभ प्रभावों को शांत करना है। मान्यता है कि इस अनुष्ठान से जीवन में आने वाली अनेक बाधाएं और रुकावटें दूर होने लगती हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वर्तमान या पूर्व जन्मों में नागों को हुई किसी भी प्रकार की हानि से उत्पन्न दोष इस पूजा के माध्यम से शांत किए जा सकते हैं। यह अनुष्ठान क्षमा याचना और आध्यात्मिक शुद्धि का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में नाग दोष को विवाह में देरी, संतान सुख में बाधा और करियर में रुकावटों का एक प्रमुख कारण माना गया है। नागबलि पूजा इन समस्याओं को कम करने और जीवन में अनुकूल परिस्थितियाँ उत्पन्न करने में सहायक मानी जाती है।
नाग देवताओं की कृपा से घर-परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। यह पूजा पारिवारिक कलह, तनाव और अस्थिरता को दूर कर सुख-शांति और समृद्धि बढ़ाने वाली मानी जाती है।
स्कंद षष्ठी के पावन अवसर पर संपन्न यह अनुष्ठान भगवान कार्तिकेय और नाग देवताओं की विशेष कृपा प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है। इससे साधक को आध्यात्मिक संरक्षण, सकारात्मकता और जीवन में प्रगति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
सनातन धर्म में नाग देवताओं को दिव्य शक्तियों का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों के अनुसार नाग केवल पृथ्वी और पाताल लोक के रक्षक ही नहीं, बल्कि कर्मों के सूक्ष्म फल देने वाले देवता भी माने जाते हैं। इसलिए नागों का अनादर, उन्हें हानि पहुँचाना अथवा पिछले जन्मों में उनसे जुड़े किसी भी प्रकार के दोष को ज्योतिष और धर्मशास्त्र में ‘सर्प दोष’ या ‘नाग दोष’ के रूप में जाना जाता है। मान्यता है कि सर्प दोष के कारण व्यक्ति के जीवन में विवाह में विलंब, संतान प्राप्ति में बाधा, आर्थिक अस्थिरता, मानसिक तनाव और बार-बार आने वाली रुकावटों जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।
इन दोषों के निवारण के लिए आश्लेषा नागबलि पूजा को अत्यंत प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान माना गया है। यह पूजा विशेष रूप से नाग देवताओं को प्रसन्न करने और उनसे क्षमा याचना करने के उद्देश्य से की जाती है। इस अनुष्ठान में नाग देवताओं की प्रिय वस्तुएँ जैसे दूध, पुष्प, अक्षत एवं अन्य पूजनीय सामग्री अर्पित की जाती हैं तथा वैदिक मंत्रों के माध्यम से उनके आशीर्वाद की प्रार्थना की जाती है। मान्यता है कि इससे सर्प दोष के नकारात्मक प्रभाव शांत होते हैं और जीवन में सुख, समृद्धि तथा सकारात्मकता का संचार होता है।
इस पूजा का महत्व स्कंद षष्ठी के पावन अवसर पर और भी बढ़ जाता है। स्कंद षष्ठी भगवान कार्तिकेय (सुब्रह्मण्य स्वामी) को समर्पित है, जिन्हें नाग देवताओं का स्वामी एवं रक्षक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन की गई नाग पूजा और नागबलि अनुष्ठान शीघ्र फलदायी होते हैं क्योंकि भगवान सुब्रह्मण्य की कृपा से नाग देवता प्रसन्न होकर साधक के जीवन से दोषों और बाधाओं को दूर करने का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। इसलिए स्कंद षष्ठी और आश्लेषा नागबलि पूजा का यह संयोग अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायी माना जाता है।
इसी शुभ अवसर पर कर्नाटक के पवित्र गोकर्ण तीर्थ क्षेत्र में आश्लेषा नागबलि पूजा का विशेष आयोजन किया जा रहा है। गोकर्ण को भारत के सात प्रमुख मुक्ति क्षेत्रों (सप्त मुक्ति क्षेत्र) में स्थान प्राप्त है और यह स्थान अपने शक्तिशाली आध्यात्मिक अनुष्ठानों तथा पाप निवारण साधनाओं के लिए प्रसिद्ध है। इस विशेष पूजा में साधक के नाम से संकल्प लेकर नाग देवताओं का पूजन, प्रार्थना और दोष निवारण अनुष्ठान संपन्न किया जाएगा तथा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति की कामना की जाएगी।
कर्नाटक के पश्चिमी तट पर स्थित गोकर्ण भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र शिव तीर्थों में से एक माना जाता है। यह स्थान भगवान महाबलेश्वर के दिव्य आत्मलिंग के कारण विशेष रूप से प्रसिद्ध है और इसे सनातन धर्म के सात प्रमुख मुक्ति क्षेत्रों (सप्त मुक्ति क्षेत्र) में स्थान प्राप्त है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, रावण द्वारा लाए गए आत्मलिंग की स्थापना इसी पवित्र भूमि पर हुई थी, जिसके कारण गोकर्ण को असाधारण आध्यात्मिक ऊर्जा और मोक्ष प्रदान करने वाला क्षेत्र माना जाता है।
गोकर्ण केवल शिव भक्ति का केंद्र ही नहीं, बल्कि पितृ दोष, नाग दोष और अन्य कर्मजनित बाधाओं के निवारण के लिए भी अत्यंत प्रसिद्ध है। सदियों से श्रद्धालु यहां विशेष अनुष्ठान, तर्पण, श्राद्ध और दोष निवारण पूजाएं संपन्न कराते आए हैं। मान्यता है कि इस पवित्र भूमि पर श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए धार्मिक कर्म कई गुना अधिक फल प्रदान करते हैं।
विशेष रूप से नाग पूजा और नागबलि जैसे अनुष्ठानों के लिए गोकर्ण का महत्व अत्यधिक माना जाता है। समुद्र, पर्वत और दिव्य आध्यात्मिक ऊर्जा से घिरा यह तीर्थ क्षेत्र साधकों को आत्मिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। यही कारण है कि देशभर से श्रद्धालु सर्प दोष निवारण और पूर्व जन्मों के कर्मों से मुक्ति की कामना लेकर इस पवित्र धाम में आते हैं।
Via Veda एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो आपको धार्मिक सेवाओं का लाभ उठाने का अवसर देता है। इसके माध्यम से आप गौसेवा, अन्नदान, और मंदिरों के पुनर्निर्माण में योगदान दे सकते हैं। साथ ही, आप अनुभवी ज्योतिषियों से परामर्श कर कुंडली, अंक ज्योतिष और वास्तु जैसी सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।
पूजा के दिन मानसिक और शारीरिक शुद्धता का ध्यान रखें, ब्रह्मचर्य का पालन करें और इष्टदेव का स्मरण करें। पूजा की प्रक्रिया के बारे में आपको पहले से सूचित किया जाएगा, और पूजा के बाद इसका रिकॉर्डेड वीडियो आपको भेजा जाएगा।
यदि आपको पूजा से संबंधित अधिक जानकारी चाहिए, तो आप Via Veda के कस्टमर सपोर्ट नंबर +91 98109 86076 पर संपर्क कर सकते हैं। हमारी टीम आपकी हर संभव सहायता के लिए तत्पर है।
Via Veda एक भरोसेमंद मंच है जो आपको घर बैठे पूजा करने का अवसर प्रदान करता है। आपकी पूजा बुकिंग के बाद, योग्य पुजारियों द्वारा शुभ मुहूर्त में अनुष्ठान संपन्न किया जाता है। इसके बाद, आपके दिए गए पते पर प्रसाद और पुजारी जी द्वारा आपके नाम और गोत्र से की गई पूजा का वीडियो आपके रजिस्टर्ड व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।
पूजा बुक होने के बाद, हमारी टीम 24 घंटों के अंदर आपसे संपर्क करेगी और आपका नाम, गोत्र आदि की जानकारी लेगी। आप टीम से पूजा से जुड़ी अन्य जानकारियाँ भी प्राप्त कर सकते हैं।
ऑफलाइन और ऑनलाइन पूजा की प्रक्रिया में ज्यादा अंतर नहीं है। दोनों में ही पुजारी आपके नाम और गोत्र से अनुष्ठान करते हैं। अंतर यह है कि ऑफलाइन पूजा में आपको स्वयं मंदिर जाना पड़ता है, जबकि ऑनलाइन पूजा में आप घर बैठे यह सुविधा प्राप्त कर सकते हैं। पूजा का रिकॉर्डेड वीडि यो आपको बाद में भेज दिया जाएगा।
हाँ, Via Veda द्वारा करवाई गई पूजा के बाद आपको उसका रिकॉर्डेड वीडियो आपके दिए गए व्हाट्सएप नंबर पर भेजा जाएगा।





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